चावल पकाने से पहले क्यों है उन्हें भिगोना जरूरी? स्वाद ही नहीं, आपकी सेहत से भी जुड़ा है यह सीक्रेट
News India Live, Digital Desk : अधिकतर घरों में चावल को धोने के तुरंत बाद पका लिया जाता है, लेकिन आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही चावल को कम से कम 20 से 30 मिनट तक भिगोने की सलाह देते हैं। ऐसा न करने पर न केवल चावल का पोषण कम हो जाता है, बल्कि यह आपके पाचन तंत्र पर भी बुरा असर डाल सकता है।
1. टॉक्सिन्स और आर्सेनिक (Arsenic) से छुटकारा
चावल की खेती के दौरान मिट्टी से कुछ हानिकारक तत्व जैसे आर्सेनिक इसमें सोख लिए जाते हैं।
फायदा: चावल को भिगोने से इसकी ऊपरी सतह पर जमा आर्सेनिक और कीटनाशकों का असर काफी हद तक कम हो जाता है, जिससे कैंसर और हृदय रोगों का खतरा घटता है।
2. 'फाइटिक एसिड' (Phytic Acid) का खात्मा
चावल में प्राकृतिक रूप से फाइटिक एसिड होता है, जिसे 'एंटी-न्यूट्रिएंट' कहा जाता है।
फायदा: यह एसिड शरीर को जिंक, आयरन और कैल्शियम जैसे जरूरी मिनरल्स सोखने से रोकता है। भिगोने से फाइटिक एसिड निकल जाता है और शरीर को चावल का पूरा पोषण मिलता है।
3. बेहतर पाचन (Easy Digestion)
चावल में स्टार्च की मात्रा अधिक होती है। भिगोने की प्रक्रिया से स्टार्च का ब्रेकडाउन शुरू हो जाता है।
फायदा: इससे चावल पकने के बाद हल्का हो जाता है और पेट में गैस, ब्लोटिंग या भारीपन की समस्या नहीं होती। जो लोग पाचन की समस्या से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह स्टेप अनिवार्य है।
4. टेक्सचर और खुशबू में सुधार
पकाने से पहले भीगे हुए चावल अधिक लंबे, खिले-खिले और नरम बनते हैं।
फायदा: भिगोने से चावल के दाने पानी सोख लेते हैं, जिससे वे अंदर तक समान रूप से पकते हैं और उनकी प्राकृतिक खुशबू भी बरकरार रहती है।
कितनी देर भिगोना है सही?
सफेद चावल (White Rice): 15 से 30 मिनट।
ब्राउन राइस (Brown Rice): कम से कम 2 से 4 घंटे (क्योंकि इसकी बाहरी परत सख्त होती है)।
बासमती चावल: 30 मिनट (लंबाई और खुशबू के लिए)।