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April 21 2026 08:26 am

सफेद साड़ी, बालों में गजरा... जान्हवी कपूर का 'परम सुंदरी' लुक देख क्यों भड़क गए मलयाली दर्शक?

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बॉलीवुड एक्ट्रेस जान्हवी कपूर अपनी खूबसूरती और शानदार अभिनय के लिए जानी जाती हैं। वह अपनी आने वाली फिल्म 'उलझ' को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में, इस फिल्म का एक गाना 'परम सुंदरी' रिलीज हुआ है, जिसमें जान्हवी कपूर एक क्लासिकल डांसर के रूप में नजर आ रही हैं। इस गाने में वह पारंपरिक सफेद और गोल्डन बॉर्डर वाली कसावु साड़ी, बालों में गजरा और टेम्पल ज्वेलरी पहने हुए एक खूबसूरत मलयाली युवती के लुक में हैं।

पहली नजर में यह लुक बेहद आकर्षक लगता है और कई लोग उनकी तारीफ भी कर रहे हैं। लेकिन, जैसे ही यह गाना और जान्हवी का यह लुक सोशल मीडिया पर सामने आया, खासकर मलयाली दर्शकों के बीच नाराज़गी की एक लहर दौड़ गई। कई लोगों ने इस लुक को "स्टीरियोटाइप" और दक्षिण भारतीय संस्कृति का एक और "सतही चित्रण" बताकर बॉलीवुड को बुरी तरह ट्रोल करना शुरू कर दिया है।

आखिर ऐसा क्या है जान्हवी के इस लुक में, जिसने लोगों को इतना नाराज़ कर दिया? चलिए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

क्या है विवाद की असली वजह?

दरअसल, विवाद जान्हवी कपूर से नहीं, बल्कि बॉलीवुड की उस पुरानी मानसिकता से है, जो दशकों से दक्षिण भारतीय किरदारों को एक ही घिसे-पिटे तरीके से दिखाता आ रहा है। मलयाली दर्शकों का आरोप है कि 'परम सुंदरी' गाने में जान्हवी का लुक असलियत से कोसों दूर है और यह सिर्फ एक और बॉलीवुड कोशिश है, जहां दक्षिण भारतीय संस्कृति को समझे बिना उसे सिर्फ एक 'कॉस्टयूम' की तरह इस्तेमाल किया गया है।

लोगों की कुछ मुख्य आपत्तियां इस प्रकार हैं:

  1. स्टीरियोटाइप की हद: कई यूजर्स ने लिखा कि कोई भी मलयाली लड़की असल जिंदगी में इस तरह तैयार नहीं होती। उनका कहना है कि सफेद कसावु साड़ी, ढेर सारा गजरा और भारी-भरकम ज्वेलरी - यह एक ऐसा कॉम्बिनेशन है जो बॉलीवुड हर बार तब इस्तेमाल करता है, जब उसे किसी "मद्रासी" (एक शब्द जिसे दक्षिण भारतीयों के लिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है) किरदार को दिखाना होता है।
  2. अतिनाटकीय और गैर-वास्तविक: सोशल मीडिया पर एक यूजर ने कमेंट किया, "इससे ज्यादा स्टीरियोटाइपिकल और क्या हो सकता है?" लोगों का कहना है कि कसावु साड़ी की अपनी एक सादगी और सौम्यता होती है, लेकिन बॉलीवुड इसे हमेशा लाउड मेकअप और अतिनाटकीय एक्सप्रेशन्स के साथ पेश करता है, जो संस्कृति का मज़ाक उड़ाने जैसा है।
  3. रिसर्च की कमी: लोगों ने फिल्म के मेकर्स पर आरोप लगाया है कि उन्होंने किरदार को रचने से पहले कोई रिसर्च नहीं की। यह लुक किसी प्रामाणिक मलयाली महिला का नहीं, बल्कि बॉलीवुड की कल्पना का एक उत्पाद लगता है।

बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय किरदारों का पुराना नाता

यह कोई पहली बार नहीं है जब बॉलीवुड पर ऐसे आरोप लगे हैं। इससे पहले भी 'चेन्नई एक्सप्रेस' में दीपिका पादुकोण के किरदार से लेकर कई अन्य फिल्मों में दक्षिण भारतीय लोगों के एक्सेंट और उनके पहनावे का मजाक बनाया गया है। एक समय था जब दर्शक इन चीजों को नजरअंदाज कर देते थे, लेकिन पैन-इंडिया सिनेमा के इस दौर में, जहां दर्शक 'पुष्पा', 'KGF' और 'कांतारा' जैसी फिल्मों में प्रामाणिक संस्कृति देख रहे हैं, वे अब बॉलीवुड से भी बेहतर की उम्मीद करते हैं।

अब दर्शक किरदारों में गहराई और उनके चित्रण में सम्मान चाहते हैं, न कि सतही और मजाकिया प्रस्तुति। जान्हवी कपूर का 'परम सुंदरी' वाला मामला इसी बदलती दर्शक मानसिकता का एक सटीक उदाहरण है। लोगों का कहना है कि बॉलीवुड को यह समझने की जरूरत है कि भारत एक विविध देश है और हर संस्कृति की अपनी एक अलग पहचान और गरिमा है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।

 

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