भ्रष्टाचार पर अपनी ही पार्टी का डंडा? राजस्थान में खींवसर विधायक रेवंत राम डांगा को बीजेपी ने क्यों थमाया नोटिस?

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News India Live, Digital Desk : कहते हैं कि सियासत में कांच की दीवारें होती हैं, सब कुछ साफ़ दिखता है। खींवसर विधायक रेवंत राम डांगा ने जब हाल ही में चुनाव जीता था, तो उन्होंने कई बड़े किलों को ढहाया था। लेकिन 30 दिसंबर 2025 की ये दोपहर उनके लिए सुकून भरी नहीं रही। बीजेपी प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर नोटिस जारी किया है।

मामला क्या है? (सिंपल भाषा में)
विधायक रेवंत राम डांगा पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने MLA LAD (विधायक कोष) के जरिए होने वाले विकास कार्यों में 'कमीशन' यानी अपना हिस्सा मांगा है। किसी सरकारी कर्मचारी या ठेकेदार के जरिए यह बात जब पार्टी के गलियारों तक पहुँची, तो संगठन ने इसे 'अनुशासनहीनता' माना। बीजेपी का दावा रहता है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हैं, और इसी को साबित करने के लिए अपने ही विधायक को नोटिस जारी कर 7 दिन के अंदर जवाब माँगा गया है।

खींवसर में हड़कंप, कार्यकर्ताओं में सन्नाटा
जैसे ही जयपुर से ये नोटिस जारी होने की खबर खींवसर पहुँची, विधायक समर्थकों के चेहरे लटक गए। खींवसर की राजनीति हमेशा से राजस्थान के केंद्र में रही है। यहाँ रेवंत राम डांगा का सीधा मुकाबला हनुमान बेनीवाल की साख से रहा है। ऐसे में खुद की पार्टी की ओर से इस तरह की कार्रवाई होना विधायक के लिए किसी बड़े सियासी झटके से कम नहीं है।

आगे क्या हो सकता है?
अभी केवल नोटिस दिया गया है और स्पष्टीकरण मांगा गया है। अगर विधायक डांगा के जवाब से पार्टी संतुष्ट नहीं होती, तो मामला अनुशासन समिति के पास जाएगा। इसमें पार्टी से निलंबन (Suspension) जैसी बड़ी कार्रवाई भी मुमकिन है। राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि यह उन विधायकों के लिए भी एक बड़ा मैसेज है जो जनता के पैसों के बंदरबाँट की कोशिश करते हैं।

अब पूरी राजस्थान की नज़र रेवंत राम डांगा के उस 'जवाब' पर टिकी है, जो वो पार्टी आलाकमान को देने वाले हैं। क्या वो बेगुनाह साबित होंगे या फिर 2026 की शुरुआत उनके करियर के लिए एक नई मुसीबत लेकर आएगी?