भरोसा किस पर करें? चाणक्य ने सदियों पहले बताई थी असली और नकली इंसान की पहचान

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आज के दौर में हम अक्सर यह जुमला सुनते हैं- "भाई, अब जमाना बदल गया है, किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता।" और यह बात काफी हद तक सही भी लगती है। रिश्तों से लेकर दफ्तर तक, हमारे सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर कौन अपना है और कौन सिर्फ अपना होने का दिखावा कर रहा है?

अगर आप भी इस कशमकश में रहते हैं, तो आचार्य चाणक्य की नीतियां आपके लिए 'गाइड' का काम कर सकती हैं। उन्होंने इंसान की फितरत को पहचानने के जो तरीके बताए थे, वो आज भी सौ फीसदी सही साबित होते हैं।

सिर्फ मीठी बातों पर न जाएं

चाणक्य साफ कहते हैं कि किसी भी इंसान पर तुरंत या आंख मूंदकर भरोसा करना बेवकूफी है। इंसान की असली पहचान उसकी बातों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार (Action) से होती है।
जरूरी नहीं कि जो आपसे बहुत प्यार से बात करे या हर बात में आपकी 'हाँ में हाँ' मिलाए, वो आपका शुभचिंतक हो। अक्सर सामने मुस्कुराने वाले लोग ही पीठ पीछे सबसे गहरा घाव देते हैं।

इसके विपरीत, वह व्यक्ति जो आपके भले के लिए आपको कड़वी सलाह दे या गलती पर टोक दे, वह उस 'मीठे दोस्त' से हजार गुना बेहतर है।

मुश्किल वक्त: रिश्तों की असली अग्निपरीक्षा

चाणक्य कहते हैं कि 'अच्छे दिन' में तो हर कोई दोस्त होता है। जब आपकी जेब भरी हो और रुतबा ऊंचा हो, तो लोग खुद-ब-खुद जुड़ते हैं। लेकिन आपके अपने वो नहीं हैं जो पार्टी में साथ हैं, आपके अपने वो हैं जो आपकी मुसीबत में साथ खड़े हैं।
जब आप संकट में हों, तब जो इंसान बिना बहाने बनाए आपके लिए खड़ा हो जाए, समझ लीजिये वही भरोसे के लायक है। बाकी सब तो बस 'भीड़' का हिस्सा हैं।

स्वार्थी लोगों से बनाएं दूरी

जीवन में ऐसे लोग भी बहुत मिलते हैं जिनका मकसद सिर्फ 'काम निकलवाना' होता है। आचार्य चाणक्य ऐसे लोगों से बहुत सावधान रहने की सलाह देते हैं। ये 'मौकापरस्त' लोग तब तक आपके साथ रहेंगे जब तक उन्हें आपसे फायदा है। जैसे ही आपकी परिस्थिति बदलेगी या उनका काम पूरा होगा, वे आपको ऐसे भूल जाएंगे जैसे कभी जानते ही न हों। ऐसे लोगों को पहचानना और उनसे दूरी बनाना ही समझदारी है।

असली साथी की 3 पक्की पहचान

आचार्य चाणक्य ने भरोसेमंद इंसान को पहचानने के लिए 3 बहुत सरल पैमाने बताए हैं। अगर किसी व्यक्ति में ये गुण हैं, तो उसका हाथ कभी न छोड़ें:

  1. कठिन समय का साथी: जो हालात बिगड़ने पर भागे नहीं, बल्कि साये की तरह साथ खड़ा रहे।
  2. भलाई की बात: जो सिर्फ आपको खुश करने के लिए नहीं, बल्कि आपकी तरक्की और भलाई के लिए बात करे (भले ही वो आपको उस वक्त बुरी लगे)।
  3. ईर्ष्या से दूर: एक सच्चा साथी आपकी सफलता देखकर जलेगा नहीं, बल्कि उसे अपनी जीत मानकर खुश होगा।

जिंदगी में लोग बहुत मिलेंगे, लेकिन जिन्हें आप अपने दिल के करीब जगह दें, उन्हें इन पैमानों पर परखना जरूर चाहिए।