जब दुनिया में आने से पहले चला गया बच्चा... तो माता-पिता ने लिया वो फैसला जो इतिहास बन गया

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एक माता-पिता के लिए अपने बच्चे को खोने से बड़ा दुःख शायद ही कोई और होता हो। और अगर वो बच्चा दुनिया में आने से पहले ही चला जाए, तो यह दर्द और भी गहरा होता है। ऐसे ही एक असहनीय दुःख के पल में, दिल्ली के एक जैन परिवार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो न सिर्फ हिम्मत की मिसाल है, बल्कि जिसने देश के मेडिकल इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।

क्या है यह ऐतिहासिक 'महादान'?

दिल्ली में रहने वाले इस जैन परिवार के घर एक बच्चे का जन्म होने वाला था, लेकिन किसी वजह से गर्भ में ही बच्चे की धड़कन रुक गई और उसका मृत जन्म (Stillborn) हुआ। दुःख के इस पहाड़ के बीच, जब डॉक्टरों ने परिवार से बात की, तो उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जो आज तक AIIMS के इतिहास में कभी नहीं हुआ था।

उन्होंने अपने उस अजन्मे बच्चे का शरीर, जिसका वजन सिर्फ 100 ग्राम था, एम्स (AIIMS) को रिसर्च के लिए दान कर दिया। यह AIIMS में हुआ पहला 'भ्रूण दान' (Foetus Donation) है।

क्यों है यह दान इतना महत्वपूर्ण?

अब आप सोच रहे होंगे कि इस दान का क्या महत्व है? यह दान उन लाखों परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण है जो ऐसी ही किसी तकलीफ से गुज़रते हैं।

  • खुलेंगे गहरे राज: डॉक्टर और वैज्ञानिक अब इस भ्रूण पर रिसर्च करके यह समझने की कोशिश करेंगे कि आखिर गर्भ में बच्चों का विकास क्यों रुक जाता है? उनमें जन्म से पहले ही कोई बीमारी या विकलांगता क्यों आ जाती है?
  • बचेंगी लाखों जानें: इस रिसर्च से मिली जानकारी भविष्य में लाखों बच्चों की जान बचाने में मदद करेगी। इससे डॉक्टरों को गर्भपात और मृत जन्म के असली कारणों का पता लगाने और उनका इलाज खोजने में मदद मिलेगी।

एम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक बहुत ही ऐतिहासिक और साहसिक कदम है। उन्होंने बताया कि उस परिवार को समझाना मुश्किल था, लेकिन जब उन्हें बताया गया कि उनका यह त्याग भविष्य में कई बच्चों को जीवन दे सकता है, तो वे इस 'महादान' के लिए तैयार हो गए।

दुःख की घड़ी में लिया गया यह निस्वार्थ फैसला, इंसानियत और सेवा की एक सच्ची मिसाल है, जो हमें सिखाता है कि कभी-कभी सबसे बड़े त्याग से ही सबसे बड़ी उम्मीद का जन्म होता है।