Passengers Plight : ट्रेन में चढ़े जीतन राम मांझी तो दिखा असली बिहार, रेल मंत्री से की ट्रेनों और जनरल कोच बढ़ाने की मांग
News India Live, Digital Desk: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने नई दिल्ली से प्रयागराज की अपनी हालिया रेल यात्रा के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ और उनके संघर्ष को करीब से देखा। इस अनुभव ने उन्हें इतना झकझोर दिया कि उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी चिंता व्यक्त की और मोदी सरकार से बिहार रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की भावुक अपील कर दी।
मांझी ने क्या देखा? (ग्राउंड रिपोर्ट)
गुरुवार, 29 जनवरी 2026 को जब मांझी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे, तो वहां का नजारा देख दंग रह गए।
अपर्याप्त ट्रेनें: उन्होंने नोट किया कि दिल्ली से बिहार के लिए चलने वाली 12-13 ट्रेनें लाखों यात्रियों के दबाव को झेलने में पूरी तरह अक्षम हैं।
जनरल कोच की हालत: सबसे खराब स्थिति जनरल बोगियों की थी, जहां मजदूर और छात्र जैसे आम नागरिक अमानवीय परिस्थितियों में यात्रा करने को मजबूर हैं।
यात्रियों का संघर्ष: उन्होंने देखा कि लोग गेट पर लटककर या फर्श पर बैठकर हजारों किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं।
मांझी की 3 मुख्य मांगें (Recommendations)
ट्रेनों की संख्या में इजाफा: दिल्ली-बिहार रूट पर कम से कम 5-6 नई दैनिक ट्रेनों की शुरुआत की जाए।
जनरल कोच बढ़ाएं: हर मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में 'सामान्य (जनरल) श्रेणियों' की बोगियों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि कम आय वाले लोग सम्मानजनक सफर कर सकें।
आधुनिकीकरण का लाभ: उन्होंने एनडीए सरकार के रेल आधुनिकीकरण (जैसे वंदे भारत) की सराहना की, लेकिन साथ ही कहा कि इसका असली लाभ तब होगा जब आम आदमी के लिए कोच बढ़ेंगे।
बजट 2026 से पहले 'सियासी रेल'
मांझी का यह बयान केंद्रीय बजट 2026 से ठीक दो दिन पहले आया है। राजनीतिक गलियारों में इसे बिहार की जनता से जुड़ने और रेल मंत्रालय पर दबाव बनाने के तौर पर देखा जा रहा है।
पीएमओ और अश्विनी वैष्णव को टैग: उन्होंने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग करते हुए इसे 'सोने पर सुहागा' कदम बताया।
क्या वाकई बढ़ेगी ट्रेनों की संख्या?
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली से बिहार के लिए रोजाना लगभग 18 से 22 ट्रेनें (सप्ताह के विभिन्न दिनों में) चलती हैं, लेकिन छठ, होली और काम के लिए पलायन करने वालों की संख्या करोड़ों में है। मांझी की मांग पर यदि अमल होता है, तो बजट में नई 'अमृत भारत' ट्रेनों (जो पूरी तरह नॉन-एसी और जनरल कोच वाली होती हैं) की घोषणा हो सकती है।