NDA से बाहर हुए तो लगा खत्म हो गया करियर, फिर मेहनत के दम पर रचा इतिहास IAS मनुज जिंदल सक्सेस स्टोरी
News India Live, Digital Desk: सफलता की राह कभी सीधी नहीं होती, और आईएएस (IAS) मनुज जिंदल का जीवन इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। एक समय था जब उनका सपना सेना में अफसर बनने का था, लेकिन नियति ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था। एनडीए से बाहर होने के बाद टूटने के बजाय मनुज ने अपनी हार को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया और यूपीएससी (UPSC) की कठिन परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 53 हासिल कर मिसाल पेश की।
NDA की ट्रेनिंग और वो एक 'झटका'
मनुज जिंदल का शुरुआती सपना भारतीय सेना में शामिल होने का था। उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की कठिन परीक्षा पास की और ट्रेनिंग शुरू कर दी। लेकिन, ट्रेनिंग के दौरान कुछ ऐसी परिस्थितियाँ बनीं (Terminated on discipline/medical grounds) कि उन्हें बाहर होना पड़ा। एक युवा के लिए, जिसका पूरा भविष्य सेना से जुड़ा था, यह एक बहुत बड़ा मानसिक झटका था।
विदेशी नौकरी छोड़ी और चुना 'कांटों भरा रास्ता'
एनडीए से बाहर आने के बाद मनुज ने हार नहीं मानी। उन्होंने विदेश से अपनी पढ़ाई पूरी की और एक प्रतिष्ठित कंपनी में लाखों के पैकेज पर नौकरी शुरू की। लेकिन उनके मन में देश सेवा का जज्बा अब भी बरकरार था। उन्होंने एक सुरक्षित और आरामदायक जिंदगी को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने का साहसी फैसला लिया।
तीन बार की असफलता और फिर 'सुपर 53'
यूपीएससी का सफर मनुज के लिए आसान नहीं रहा। वे पहले तीन प्रयासों में असफल रहे। कई लोग इस मोड़ पर आकर हिम्मत हार जाते हैं, लेकिन मनुज ने अपनी गलतियों से सीखा। उन्होंने अपनी स्ट्रेटजी बदली और चौथे प्रयास में न केवल परीक्षा पास की, बल्कि 53वीं रैंक हासिल कर अपनी योग्यता साबित कर दी।
आकांक्षी छात्रों के लिए मनुज के 'सक्सेस मंत्र'
आज मनुज जिंदल सोशल मीडिया और अपने ब्लॉग के माध्यम से लाखों यूपीएससी उम्मीदवारों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उनके कुछ प्रमुख सुझाव:
निरंतरता (Consistency): पढ़ाई में गैप न आने दें।
गलतियों का विश्लेषण: पिछली असफलता के कारणों को गहराई से समझें।
मानसिक मजबूती: हार को अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत मानें