टीम में जगह नहीं मिली तो कोच का सर फोड़ दिया? क्रिकेट के मैदान से आई शर्मनाक खबर
News India Live, Digital Desk : हम सब बचपन से सुनते आ रहे हैं कि क्रिकेट एक 'Gentleman’s Game' है। यहाँ अनुशासन और खेल भावना (sportsmanship) सबसे ऊपर होती है। लेकिन कभी-कभी कुछ ऐसी खबरें आती हैं जो इस भरोसे को तोड़ देती हैं। हाल ही में महाराष्ट्र के बदलापुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर किसी का भी दिल दहल जाएगा। ज़रा सोचिए, एक कोच जो खिलाड़ियों को तराशता है, अगर उसी कोच को उसका स्टूडेंट सिर्फ इसलिए अधमरा कर दे क्योंकि उसका सिलेक्शन नहीं हुआ, तो आप क्या कहेंगे?
आखिर हुआ क्या था?
यह पूरी घटना बदलापुर क्रिकेटर्स एसोसिएशन के हेड कोच मंदार महाले के साथ हुई। खबर है कि विजय शिरके टूर्नामेंट के लिए टीम का सिलेक्शन चल रहा था। एक खिलाड़ी (जिसका नाम नहीं लिया जाना ही बेहतर है, पर रिपोर्ट्स में उसे मुख्य आरोपी बताया गया है) को उम्मीद थी कि उसका नाम लिस्ट में होगा। लेकिन जब उसे टीम में जगह नहीं मिली, तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
नाराजगी होना आम बात है, हर खिलाड़ी खेलना चाहता है। लेकिन इस खिलाड़ी ने जो किया, वो कोई आम बात नहीं थी। उसने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर कोच मंदार महाले को घेर लिया।
मैदान पर खूनी मंजर
आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन बात सिर्फ बहस तक नहीं रही। उस खिलाड़ी और उसके साथियों ने कथित तौर पर कोच पर लोहे की रॉड और क्रिकेट बैट से हमला कर दिया। हमला इतना भयानक था कि कोच महाले के सिर पर 20 टांके आए हैं और उनका कंधा फ्रैक्चर हो गया है। जिस गुरु ने हाथ पकड़कर बैट पकड़ना सिखाया, उसी पर बैट से वार करना किस हद तक सही है?
जब यह हमला हो रहा था, वहां मौजूद बाकी लोग भी सन्न रह गए। कोच को लहुलूहान हालत में छोड़कर आरोपी वहां से भाग निकले।
अब क्या हो रहा है?
फिलहाल, कोच मंदार महाले अस्पताल में हैं और अपनी चोटों से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और उन खिलाड़ियों की तलाश कर रही है जो इस हमले के बाद से फरार हैं। यह घटना सिर्फ एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाती है कि आज के युवा खिलाड़ियों में सहनशीलता (patience) क्यों खत्म होती जा रही है?
खेल भावना कहाँ गई?
खेल हमें हार और जीत, दोनों को स्वीकार करना सिखाता है। अगर सिलेक्शन नहीं हुआ, तो मेहनत करके अगली बार वापसी की जा सकती थी। लेकिन हिंसा का रास्ता चुनकर इन खिलाड़ियों ने न सिर्फ अपना करियर खतरे में डाला है, बल्कि क्रिकेट की छवि को भी नुकसान पहुँचाया है।