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March 17 2026 01:51 pm

क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा या बस एक और नाम? वैभव सूर्यवंशी के साथ आखिर क्या होना चाहिए?

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News India Live, Digital Desk : क्या आपने 13 साल के उस लड़के की कहानी सुनी है, जिसने रातों-रात पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया? जी हाँ, मैं बात कर रहा हूँ वैभव सूर्यवंशी की। वही लड़का जिसे हाल ही में आईपीएल के ऑक्शन में राजस्थान रॉयल्स ने सवा करोड़ से भी ज्यादा की कीमत पर खरीदा है। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा पैसा और शोहरत मिलना कोई छोटी बात नहीं है।

लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि वैभव का भविष्य क्या होना चाहिए? ताज़ा चर्चा ये है कि क्या उन्हें अब भी अंडर-19 टीमों में खिलाया जाना चाहिए?

अंडर-19 खिलाना 'टाइम वेस्ट' क्यों?
अक्सर जब कोई बच्चा इतना एक्स्ट्राऑर्डिनरी (Extraordinary) टैलेंट दिखाता है, तो हम उसे सुरक्षित रखने के चक्कर में उसकी उम्र के खिलाड़ियों के साथ ही खेलने देते हैं। लेकिन वैभव के मामले में जानकारों की राय थोड़ी अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव ने 13-14 की उम्र में वो कर दिखाया है, जो लड़के 18-19 साल की उम्र में नहीं कर पाते। अगर वो अभी भी अपनी ही उम्र के या अंडर-19 लड़कों के खिलाफ खेलते रहे, तो उनकी स्किल्स को असली चुनौती नहीं मिलेगी।

असली चुनौती बड़ों के बीच है
बात सीधी सी है अगर किसी के पास 'गॉड-गिफ्टेड' टैलेंट है, तो उसे तेज धूप में निखारना ज़रूरी है। उसे रणजी ट्रॉफी (Ranji Trophy) जैसे बड़े टूर्नामेंट्स और इंडिया-A जैसी टीमों में शामिल करना चाहिए जहाँ उसे असली प्रोफेशनल तेज गेंदबाजों और स्पिनर्स का सामना करना पड़े। जब कोई 140-145 की रफ्तार वाली गेंद झेलेगा, तभी समझ आएगा कि वो इंटरनेशनल लेवल के लिए कितना तैयार है।

पिछली गलतियों से सीख
क्रिकेट की दुनिया में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जहाँ 'वंडर किड्स' छोटी उम्र में ही बड़े टूर्नामेंट खेल गए। तेंदुलकर इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं जिन्होंने 16 साल की उम्र में दुनिया के सबसे घातक गेंदबाजों का सामना किया था। अगर तेंदुलकर को तब अंडर-19 तक ही सीमित रखा जाता, तो शायद उनकी कहानी आज कुछ और होती।

यही वजह है कि अब टीम इंडिया और मैनेजमेंट को यह सोचना होगा कि क्या वैभव को सिर्फ अंडर-19 के स्कोरबोर्ड तक सीमित रखना सही है, या फिर उसे सीधे गहरी नदी में उतार दिया जाए ताकि वह एक सच्चा मैच-विजेता बन सके।

आप क्या सोचते हैं? क्या वैभव को बच्चों के साथ ही खेलना चाहिए या उसे 'बड़ों वाली क्रिकेट' के लिए भेज देना चाहिए?