डोनाल्ड ट्रंप का शांतिदूत बनने का दावा ,भारत-पाकिस्तान युद्ध-विराम का सच क्या है?

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News India Live, Digital Desk: हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष-विराम को लेकर एक ऐसा दावा किया है, जिसने कई लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच शांति उनके प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए गए 'टैरिफ' की वजह से संभव हुई. ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया कि उनकी वजह से भारत एक शांति दूत बन गया है!

फ्लोरिडा में अपने एक कार्यक्रम में डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि कैसे उनके प्रशासन ने भारत पर "कई टैरिफ" लगाए थे. उनका तर्क था कि इन्हीं टैरिफ के दबाव के चलते भारत, पाकिस्तान के साथ एक समझौते पर पहुंचा, क्योंकि भारत ये टैरिफ हटवाना चाहता था. उन्होंने कहा, "आप जानते हैं कि भारत-पाकिस्तान का सीमा संघर्ष चल रहा था और उनके टैरिफ हटाना चाहते थे." ट्रंप के मुताबिक, उन्हें कुछ दिनों के लिए दोनों को कहना पड़ा कि तुम आपस में झगड़ा करना बंद करो. उन्होंने आगे कहा कि दोनों को बातचीत की मेज पर लाना और कुछ खास करना था, और वे ही शांति दूत थे.

लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है. भारत और पाकिस्तान के बीच फरवरी 2021 में जो संघर्ष-विराम समझौता हुआ था, वह दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच बनी एक समझ के कारण था. यह सालों से चली आ रही सीमा पर फायरिंग और झड़पों के बाद का एक साझा निर्णय था.

भारत सरकार हमेशा से कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का खंडन करती रही है. भारत का यह साफ रुख रहा है कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इस पर सिर्फ भारत और पाकिस्तान ही आपस में बात करेंगे. रही बात टैरिफ की, तो वे भारत ने अपने घरेलू उद्योगों को बचाने और बढ़ावा देने के लिए लगाए थे, न कि पाकिस्तान के साथ किसी बातचीत के दबाव के लिए. ट्रंप का यह दावा तथ्यों से परे और काफी हद तक उनकी 'अपनी कल्पना' है. भारत कभी भी किसी के कहने पर या दबाव में आकर अपने पड़ोसी देश से रिश्ते तय नहीं करता. भारत ने हमेशा बातचीत और शांति का मार्ग प्रशस्त किया है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता से कोई समझौता नहीं.