छत्तीसगढ़ की कोयला खदानों में आखिर हुआ क्या था? AAP के तीखे आरोपों ने जिंदल ग्रुप के सामने खड़े किए बड़े सवाल
News India Live, Digital Desk : छत्तीसगढ़ को संसाधनों की धरती कहा जाता है, लेकिन अक्सर यही संसाधन यहाँ के लोगों और बड़ी कंपनियों के बीच टकराव की वजह बन जाते हैं। ताजा मामला जिंदल ग्रुप की कोयला खदानों के आसपास हुई हिंसा का है। आम आदमी पार्टी ने इस मामले में दखल देते हुए कंपनी पर गंभीर आरोप जड़ दिए हैं। पार्टी का कहना है कि खदानों के आसपास जो कुछ भी हो रहा है, वो न सिर्फ गलत है बल्कि डराने वाला भी है।
मामला क्या है?
दरअसल, छत्तीसगढ़ में जिंदल ग्रुप के प्रोजेक्ट्स और कोयला खदानों से जुड़े इलाकों में पिछले दिनों कुछ हिंसक घटनाएं सामने आई थीं। AAP का आरोप है कि कंपनी प्रशासन की शह पर अपनी ताकत का इस्तेमाल कर स्थानीय लोगों और विरोध करने वालों की आवाज को दबा रही है। पार्टी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ़ शब्दों में कहा कि व्यापार के नाम पर आम जनता और आदिवासियों के अधिकारों का हनन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
AAP की सबसे बड़ी मांग न्यायिक जांच'
आम आदमी पार्टी ने केवल आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि उन्होंने सरकार से एक 'न्यायिक जांच' (Judicial Inquiry) की मांग की है। उनका तर्क है कि अगर प्रशासन या पुलिस इस मामले की जांच करेगी, तो सच पूरी तरह सामने नहीं आएगा क्योंकि बड़े समूहों का रसूख जांच को प्रभावित कर सकता है। पार्टी चाहती है कि दूध का दूध और पानी का पानी करने के लिए किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में पूरी छानबीन हो।
हक की लड़ाई या सियासी रोटियां?
बड़ी कंपनियों का कहना है कि वे नियम-कानून के दायरे में काम कर रहे हैं और विकास के लिए खदानें ज़रूरी हैं। वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग अपनी ज़मीन, प्रदूषण और अपने हक को लेकर चिंतित हैं। AAP ने इसी नब्ज को पकड़ा है। छत्तीसगढ़ की जनता देख रही है कि कैसे एक तरफ आर्थिक उन्नति के दावे किए जाते हैं, तो दूसरी तरफ उन मजदूरों और ग्रामीणों की चीखें गुम हो जाती हैं जो इसी ज़मीन के असली हकदार हैं।