West Bengal Politics: चुनाव से पहले बंगाल में बवाल! सुवेंदु अधिकारी पर फेंका गया जूता, CEO ऑफिस के बाहर TMC-BJP समर्थकों में हिंसक झड़प
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। चुनाव से पहले ही राज्य में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच हिंसक टकराव का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार (24 फरवरी) को कोलकाता स्थित मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के कार्यालय के बाहर उस वक्त भारी बवाल मच गया, जब बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी पर सरेआम जूता फेंक दिया गया। इस घटना के बाद दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए और जमकर नारेबाजी व धक्का-मुक्की हुई। हालात बेकाबू होते देख भारी पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा।
वोटर लिस्ट को लेकर चल रहा था TMC का प्रदर्शन
जानकारी के मुताबिक, इस पूरे हंगामे की जड़ मतदाता सूची (Voter List) से जुड़ा एक विवाद है। दरअसल, मंगलवार को CEO ऑफिस के बाहर टीएमसी से जुड़े बीएलओ (BLO) कार्यकर्ता जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्हें सूचना मिली थी कि करीब 8000 ऐसे मतदाता, जिन्होंने अपने जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं किए हैं, उनका नाम 28 फरवरी को जारी होने वाली फाइनल वोटर लिस्ट से काटा जा सकता है। इसी बात को लेकर टीएमसी समर्थक काफी देर से चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठे थे।
सुवेंदु अधिकारी की एंट्री और उड़ने लगे जूते
इसी गहमागहमी के बीच भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी अपनी एक शिकायत लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचे। सुरक्षाकर्मियों ने सुवेंदु अधिकारी को तो दफ्तर के अंदर जाने की इजाजत दे दी, लेकिन बाहर प्रदर्शन कर रहे टीएमसी समर्थकों को मिलने से रोक दिया। यह देखकर प्रदर्शनकारी भड़क गए। जैसे ही सुवेंदु दफ्तर में दाखिल हो रहे थे, भीड़ ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, उन्हें जूते दिखाए गए और इसी दौरान किसी ने उन पर जूता फेंक दिया। अपने नेता के साथ हुए इस दुर्व्यवहार को देखकर वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ता भी आक्रोशित हो गए और उन्होंने 'जय श्री राम' तथा 'सुवेंदु जिंदाबाद' के गगनभेदी नारे लगाने शुरू कर दिए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
ऑडियो क्लिप की जांच कराने पहुंचे थे सुवेंदु
इस घटना पर सुवेंदु अधिकारी का कहना है कि वे चुनाव आयोग को एक संदिग्ध 'ऑडियो क्लिप' सौंपने और उसकी फॉरेंसिक जांच की मांग करने के लिए वहां गए थे। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने और उसमें गड़बड़ी करने की बड़ी साजिश रची जा रही है, जिस पर आयोग को तुरंत और सख्त कदम उठाने चाहिए। वहीं, दूसरी तरफ टीएमसी ने भाजपा के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे चुनाव से पहले का 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया है।
चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
कोलकाता के वीवीआईपी इलाके में और सीधे चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर हुई इस हिंसक झड़प ने बंगाल की कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि राज्य में चुनावी हिंसा को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में शांतिपूर्ण माहौल कैसे स्थापित किया जाए, ताकि आम जनता बिना किसी खौफ के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके।