सियासी मैदान से दूर थे, मगर दुख की घड़ी में साथ खड़े हुए ,जहानाबाद की उस बेटी के घर जब पहुंचे प्रशांत किशोर

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में पिछले कुछ महीनों से एक सवाल हर किसी के मन में था 'जन सुराज' वाले प्रशांत किशोर (PK) कहाँ गायब हैं? चुनाव के नतीजों के बाद उनकी खामोशी ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया था। लेकिन अब करीब 2 महीने बाद प्रशांत किशोर एक बार फिर एक्टिव मोड में नज़र आ रहे हैं।

इस बार वे किसी चुनावी रैली के लिए नहीं, बल्कि एक दुखी परिवार का आंसू पोंछने के लिए निकले हैं। मामला है जहानाबाद की एक मासूम बच्ची की मौत का, जिसकी पटना के एक अस्पताल में इलाज के दौरान जान चली गई थी।

दुख की इस घड़ी में परिवार के साथ खड़ा होना
प्रशांत किशोर ने अपनी चुप्पी तोड़ी और सीधे जहानाबाद पहुंचे। वहाँ उन्होंने उस बच्ची के माता-पिता से मुलाकात की और उनका दर्द सुना। पीके का यह अंदाज़ उनके पुराने 'रणनीतिकार' वाले लुक से थोड़ा अलग है। यहाँ वे एक नेता के बजाय एक संवेदशनील इंसान के रूप में नज़र आए। उन्होंने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि वे इस लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं।

बिहार के हेल्थ सिस्टम पर उठाए बड़े सवाल
मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर ने मीडिया से बात करते हुए बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर जमकर हमला बोला। उन्होंने साफ़ कहा कि जिस राज्य की राजधानी में एक मासूम की इलाज के अभाव में मौत हो जाती है, वहाँ की व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़मी है। उन्होंने सवाल उठाया कि "आखिर कब तक आम आदमी सिस्टम की लापरवाही का शिकार होता रहेगा?"

सियासी गलियारों में चर्चा तेज
भले ही यह एक मानवीय संवेदना वाला दौरा था, लेकिन राजनीति के जानकार इसे प्रशांत किशोर की 'वापसी' (Comeback) के रूप में देख रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रशांत किशोर शायद यह मैसेज देना चाहते हैं कि चुनावी हार से उनका हौसला टूटा नहीं है और 'जन सुराज' का अभियान रुकने वाला नहीं है। वे अब जमीनी मुद्दों को उठाकर जनता के बीच अपनी पैठ फिर से मजबूत करना चाहते हैं।

हमारी राय
किसी भी नेता की असली परीक्षा उसकी जीत में नहीं, बल्कि हार के बाद वापस खड़े होने में होती है। प्रशांत किशोर ने जहानाबाद जाकर यह संकेत दे दिया है कि वे अभी थके नहीं हैं। अगर वे इसी तरह लोगों की बुनियादी समस्याओं (शिक्षा और स्वास्थ्य) से जुड़ते रहे, तो आने वाला चुनाव वाकई दिलचस्प होने वाला है।

आप प्रशांत किशोर की इस सक्रियता को कैसे देखते हैं? क्या उन्हें अपनी हार से सबक मिला है या ये सिर्फ राजनीति का हिस्सा है? अपनी राय हमें कमेंट्स में जरूर बताएं।