लोकसभा में छिड़ी महिला आरक्षण पर जंग, अमित शाह का अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार
News India Live, Digital Desk: संसद के विशेष सत्र के दौरान आज (16 अप्रैल 2026) लोकसभा में महिला आरक्षण (131वां संविधान संशोधन विधेयक) और परिसीमन विधेयक 2026 को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव के बीच हुए तीखे वाकयुद्ध ने सदन का तापमान बढ़ा दिया।
अखिलेश यादव के सवाल: 'जनगणना पहले, आरक्षण बाद में'
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की 'जल्दबाजी' पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार को घेरा:
जाति जनगणना की मांग: अखिलेश ने कहा कि सरकार बिना जनगणना के आरक्षण कैसे लागू कर सकती है? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जाति जनगणना से बच रही है।
मुस्लिम महिलाओं का मुद्दा: उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 50% की आरक्षण सीमा के भीतर मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण मिलेगा?
पिछला दरवाजा: अखिलेश ने इसे "पिछले दरवाजे से परिसीमन" लाने का एक तरीका बताया और कहा कि सरकार महिलाओं को गुमराह कर रही है।
अमित शाह का करारा जवाब: 'धर्म आधारित आरक्षण असंवैधानिक'
अखिलेश यादव के आरोपों पर पलटवार करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का रुख स्पष्ट किया:
जनगणना पर स्पष्टीकरण: शाह ने सदन को भरोसा दिलाया कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसमें जाति आधारित गणना (Caste Census) भी शामिल होगी।
सपा पर तंज: उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "अभी घरों की लिस्टिंग चल रही है; घरों की कोई जाति नहीं होती। अगर सपा का बस चले, तो वे घरों को भी जाति अलॉट कर दें।"
धर्म और आरक्षण: मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग कोटा की मांग पर शाह ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि धर्म के आधार पर किसी भी प्रकार का आरक्षण असंवैधानिक है और भारत का संविधान इसकी अनुमति नहीं देता।
खुली चुनौती: उन्होंने अखिलेश से कहा, "हम सपा को अपनी सभी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को देने से नहीं रोक रहे हैं, आप ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं।"
सत्र की अन्य बड़ी बातें
सीटों में बढ़ोत्तरी: प्रस्तावित विधेयक के तहत 2029 के चुनावों से पहले लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 (अधिकतम) करने का प्रस्ताव है।
वोटिंग का नतीजा: हंगामे के बीच विधेयक पेश करने के पक्ष में 251 वोट पड़े, जबकि विरोध में 185 वोट रहे।
उद्देश्य: इस कानून के जरिए 2029 के आम चुनाव से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।