उमर खालिद की रिहाई के लिए अमेरिका में उठी आवाज, 8 सांसदों ने भारतीय राजदूत को लिखा खत, पूछा - 5 साल से बिना सुनवाई के जेल में क्यों?
JNU के पूर्व छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद, जो पिछले 5 सालों से ज्यादा समय से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं, उनका मामला अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका के 8 डेमोक्रेटिक सांसदों ने एक साथ मिलकर भारत सरकार से उमर खालिद की रिहाई की मांग की है।
इन सांसदों ने वाशिंगटन में भारत के राजदूत को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें उन्होंने दो बड़ी मांगें की हैं:
- उमर खालिद को तुरंत जमानत दी जाए।
- उनकी सुनवाई बिना किसी और देरी के, निष्पक्ष तरीके से शुरू की जाए।
यह मामला तब और गरमा गया जब उमर खालिद के माता-पिता ने दिसंबर में अमेरिका जाकर कुछ नेताओं से मुलाकात की थी।
कौन हैं उमर खालिद और वे जेल में क्यों हैं?
उमर खालिद JNU के एक पूर्व छात्र हैं। उन्हें 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे एक "बड़ी साजिश" रचने के आरोप में UAPA (एक बहुत ही सख्त आतंकवाद विरोधी कानून) के तहत गिरफ्तार किया गया था। तब से, यानी 5 साल से भी ज्यादा समय से, वे बिना किसी सुनवाई (trial) के जेल में बंद हैं।
अमेरिकी सांसदों ने अपनी चिट्ठी में क्या कहा?
सांसदों ने भारत के लोकतंत्र का सम्मान करते हुए, कुछ बहुत ही सीधे और कड़े सवाल उठाए हैं:
- "किसी व्यक्ति को 5 साल से ज्यादा समय तक बिना किसी सुनवाई के जेल में रखना, अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों के खिलाफ है।"
- उन्होंने यह भी पूछा है कि गिरफ्तारी के 5 साल बाद भी अब तक न्यायिक कार्यवाही शुरू क्यों नहीं हुई है?
- उन्होंने भारत सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उमर खालिद को एक निष्पक्ष और समय पर सुनवाई का पूरा मौका मिले।
इस चिट्ठी पर साइन करने वालों में प्रमिला जयपाल और रशीदा तलैब जैसे भारत-विरोधी माने जाने वाले नेताओं के नाम भी शामिल हैं।
क्या भारतीय अदालतें दे रही हैं राहत?
यह भी सच है कि भारतीय अदालतों ने उमर खालिद को कुछ खास मौकों पर थोड़ी राहत दी है। हाल ही में, 11 दिसंबर को दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए 16 से 29 दिसंबर तक की अंतरिम जमानत दी थी।
हालांकि, इस दौरान उन पर कई शर्तें लगाई गई थीं, जैसे - वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकते और किसी भी गवाह से संपर्क नहीं कर सकते।
अब देखना यह है कि अमेरिकी सांसदों की इस चिट्ठी के बाद, भारत सरकार की तरफ से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है।