"वीज़ा महंगा, सम्‍मान कम... ये कैसी विदेश नीति?" - अखिलेश यादव ने सरकार पर कसा तंज

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देश की विदेश नीति और दुनिया में भारत के बढ़ते कद को लेकर सरकार अक्सर अपनी पीठ थपथपाती है, लेकिन समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इससे बिलकुल सहमत नहीं दिखते. अमेरिका द्वारा वीज़ा की फ़ीस बढ़ाए जाने को लेकर उन्होंने सरकार पर ज़ोरदार हमला बोला है और कहा है कि ये भारत की कमज़ोर होती विदेश नीति का सबूत है.

मंगलवार को एक्स (जो पहले ट्विटर था) पर एक पोस्ट में अखिलेश यादव ने लिखा, "एक तरफ़ अमेरिका ने भारतीयों के लिए वीज़ा फ़ीस को दोगुना कर दिया है, तो दूसरी तरफ़ रूस के राष्‍ट्रपति के बयान ने भारत की गुटनिरपेक्ष नीति पर ही सवाल खड़ा कर दिया है." उन्होंने इसे 'ऐतिहासिक भूल' बताते हुए कहा कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ.

"भाजपा राज में मिल रहा दोहरा अपमान"

अखिलेश यादव ने इसे सिर्फ़ एक फ़ैसले की तरह नहीं, बल्कि भारत के सम्मान से जोड़कर देखा. उन्होंने कहा, "भाजपा के राज में हमें दोहरा अपमान मिल रहा है. हमें वीज़ा के लिए पैसे भी ज़्यादा देने पड़ रहे हैं और हमारा सम्मान भी कम हो रहा है."

उनका निशाना साफ़ तौर पर सरकार की उस विदेश नीति पर है, जिसके दम पर अक्सर 'दुनिया में भारत का डंका बजने' की बात की जाती है. अखिलेश का कहना है कि अगर सच में हमारा प्रभाव इतना मज़बूत होता, तो हमारे नागरिकों के लिए इस तरह के फ़ैसले नहीं लिए जाते.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, अमेरिका ने हाल ही में एच-1बी (H-1B) और एल-1 (L-1) जैसे कुछ ज़रूरी वीज़ा की फ़ीस में भारी बढ़ोतरी की है. इसका सीधा असर उन हज़ारों भारतीय छात्रों और आईटी पेशेवरों पर पड़ेगा जो हर साल काम करने और पढ़ने के लिए अमेरिका जाते हैं. अब उन्हें वीज़ा के लिए पहले से काफ़ी ज़्यादा पैसे ख़र्च करने होंगे.

अखिलेश यादव ने इसी मुद्दे को पकड़कर सरकार को घेरा है. उनका कहना है कि सरकार दुनिया भर में अपनी दोस्ती का ढिंढोरा पीटती है, लेकिन जब अपने ही लोगों के हितों की बात आती है, तो ये दोस्ती कहीं नज़र नहीं आती. उन्होंने सवाल उठाया कि जब हमारे संबंध इतने ही अच्छे हैं, तो हमारे लोगों को यह 'सज़ा' क्यों दी जा रही है?

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में चुनावों का माहौल बनना शुरू हो गया है, और विपक्ष हर मौक़े पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाकर उसे घेरने की कोशिश कर रहा है.