Vincent John Luxury Hotel Scammer: 5-स्टार होटलों की नाक में दम करने वाला 'नटवरलाल' विंसेंट जॉन गिरफ्तार, चार्ल्स शोभराज को गुरु मानकर 30 साल से कर रहा था ठगी

Vincent John Luxury Hotel Scammer: 5-स्टार होटलों की नाक में दम करने वाला 'नटवरलाल' विंसेंट जॉन गिरफ्तार, चार्ल्स शोभराज को गुरु मानकर 30 साल से कर रहा था ठगी

सफेद बाल, चेहरे पर गजब की शालीनता और बेहद फर्राटेदार अंग्रेजी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक आलीशान 7 मंजिला लग्जरी होटल में जब यह 69 साल का बुजुर्ग पहुंचा, तो उसकी रईसी देखकर होटल के बड़े-बड़े अधिकारियों को भी उस पर रत्ती भर शक नहीं हुआ। वह दो दिनों तक होटल में पूरे ठाठ-बाठ से रहा और फिर दो बैग लेकर चुपचाप नौ दो ग्यारह हो गया। जब होटल स्टाफ को असलियत का पता चला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वह बुजुर्ग न सिर्फ ₹63,755 का बिल चुकाए बिना भागा था, बल्कि स्टाफ का एक कीमती लैपटॉप भी पार कर गया था। यह शातिर कहानी है विंसेंट जॉन (Vincent John) की, जिसने पिछले तीन दशकों से देश के सैकड़ों फाइव-स्टार होटलों को चूना लगाकर पुलिस की नाक में दम कर रखा था।

टूरिस्ट गाइड से कैसे बना लग्जरी होटलों का सबसे बड़ा ठग?

विंसेंट जॉन मूल रूप से तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले का रहने वाला है। एक अच्छे इंग्लिश मीडियम स्कूल से पढ़ा-लिखा विंसेंट अविवाहित है। 1980 के दशक में उसने दिल्ली में एक टूरिस्ट गाइड के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। गाइड होने की वजह से उसे अक्सर बड़े और महंगे होटलों में मुफ्त में रुकने का मौका मिलता था। बस यहीं से उसे फाइव-स्टार लाइफस्टाइल और आलीशान होटलों में रहने का चस्का लग गया। पुलिस की जांच में सामने आया है कि वह अब तक दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गोवा और केरल समेत देश के कई राज्यों के बड़े होटलों में लाखों की चपत लगा चुका है।

जिलत का बदला लेने के लिए चुना जुर्म का रास्ता, चार्ल्स शोभराज को माना गुरु

आखिर इस पढ़े-लिखे बुजुर्ग ने ठगी का यह रास्ता क्यों चुना? जांच अधिकारी पीयूष बघेल ने बताया कि करियर के शुरुआती दिनों में एक आलीशान होटल के मैनेजमेंट ने विंसेंट को किसी बात पर बुरी तरह जलील (Insult) किया था। विंसेंट ने इस बेइज्जती को अपने दिल पर ले लिया और ठान लिया कि वह इन बड़े-बड़े होटलों से इसका बदला लेगा और कभी इन्हें एक रुपया भी नहीं देगा। वह पहली बार साल 1996 में दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा था। तिहाड़ जेल में रहने के दौरान उसने दुनिया के मशहूर ठग और बिकनी किलर चार्ल्स शोभराज (Charles Sobhraj) की कहानियां सुनीं और उसके शातिर दिमाग का ऐसा फैन हुआ कि उसने ठगी को ही अपना फुल-टाइम प्रोफेशन बना लिया।

'अखबारों से भरा बैग और झूठा रोब' — ठगी का बेहद शातिर स्टाइल

विंसेंट जॉन के ठगी करने का तरीका किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा है। वह होटलों में कभी योगा टीचर, कभी इंग्लिश प्रोफेसर तो कभी कॉर्पोरेट इवेंट ऑर्गेनाइजर बनकर बड़ी ही धमक के साथ एंट्री लेता था। होटल आते वक्त उसके पास हमेशा दो वीआईपी बैग होते थे। एक बैग में उसका असली सामान होता था और दूसरे बैग में वह केवल रद्दी अखबार या भारी तकिए भरकर रखता था। वह सुरक्षा जांच के समय स्टाफ को अपना बैग कभी छूने नहीं देता था। जब उसे होटल से रफूचक्कर होना होता था, तब वह अखबारों वाला बैग कमरे में ही छोड़ जाता था ताकि हाउसकीपिंग स्टाफ को लगे कि मेहमान अभी होटल में ही रुका हुआ है और कोई शक न करे।

रायपुर के 5-स्टार होटल में ऐसे किया कांड, ₹1.48 लाख का लैपटॉप उड़ाया

रायपुर के फाइव-स्टार होटल में विंसेंट एक बड़ा इवेंट ऑर्गेनाइजर बनकर रुका था। अपनी मीठी बातों और अंग्रेजी के रौब से उसने होटल के एक भोले-भाले कर्मचारी को जाल में फंसाया और उसे एक बड़ी कंपनी में ऊंची सैलरी वाली नौकरी का लालच दिया। इसी बहाने उसने उस कर्मचारी का ₹1.48 लाख का कीमती लैपटॉप उड़ा लिया। होटल में रुकने के दौरान उसने महंगी विदेशी शराब और सिगरेट्स के ऑर्डर दिए, जबकि वह असल जिंदगी में न तो शराब पीता है और न ही स्मोक करता है। भागने से पहले उसने रिसेप्शन पर झूठ कहा कि उसका बेटा भी आने वाला है, इसलिए एक और कमरा बुक कर दें और मौका मिलते ही वह बिल दिए बिना गायब हो गया।

पुलिस के सामने रोने का नाटक; बदनामी के डर से केस नहीं करते थे होटल

चोरी किए गए लैपटॉप को तुरंत बेचकर विंसेंट ट्रेन से ओडिशा के भुवनेश्वर भाग गया था, लेकिन रायपुर पुलिस की मुस्तैद टीम ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने वह बेहद सीधा, शरीफ और पछतावे से भरा चेहरा बना लेता है। उसने पुलिस से रोते हुए कहा, "साहब, यह मेरा आखिरी गुनाह था, अब मैं सुधरकर गोवा के किसी ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) में अपनी बाकी जिंदगी बिताना चाहता हूँ।" हालांकि, पुलिस का कहना है कि यह विंसेंट का पुराना पैंतरा है और वह हर बार पकड़े जाने पर यही इमोशनल ड्रामा करता है। देश के कई बड़े फाइव-स्टार होटल अपनी साख और बदनामी के डर से पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराते थे, जिसका फायदा विंसेंट पिछले 30 सालों से उठा रहा था।

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