Computer Science Graduate: 500 से ज्यादा कंपनियों में किया अप्लाई, पर कहीं नहीं मिली नौकरी; अब सुबह 6 बजे से Rapido चलाने को मजबूर है यह फर्स्ट क्लास ग्रेजुएट
नई दिल्ली/लखनऊ: इंजीनियरिंग या कंप्यूटर साइंस की बड़ी डिग्री हासिल करने के बाद हर छात्र का यही सपना होता है कि उसे किसी मल्टीनेशनल कंपनी (MNC) में अच्छी नौकरी मिले और वह अपने शानदार करियर की शुरुआत करे. लेकिन वर्तमान समय में देश के युवाओं के लिए यह सपना हकीकत में बदलना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है. आईटी सेक्टर और टेक इंडस्ट्री में चल रही मंदी के बीच सोशल मीडिया पर एक ऐसी भावुक कर देने वाली कहानी वायरल हो रही है, जिसने मौजूदा जॉब मार्केट की कड़वी सच्चाई को एक बार फिर सबके सामने लाकर खड़ा कर दिया है.
यह कहानी कंप्यूटर साइंस (CS) से फर्स्ट डिवीजन में ग्रेजुएशन करने वाले एक ऐसे होनहार लड़के की है, जो सैकड़ों कंपनियों के चक्कर काटने के बाद जब थक गया, तो पेट पालने और अपना खर्च चलाने के लिए रैपिडो (Rapido) बाइक टैक्सी चलाने पर मजबूर हो गया.
ट्रैफिक जाम में 'रैपिडो राइड' के दौरान खुला ये चौंकाने वाला राज
इस दिल छू लेने वाली कहानी को एक्स (पूर्व में ट्विटर) के एक यूजर 'नीरज' (@nirajxdev) ने सोशल मीडिया पर साझा किया है. नीरज ने अपनी पोस्ट में बताया कि उन्होंने पिछले दिनों दिल्ली-एनसीआर में एक Rapido बाइक बुक की थी. सफर के दौरान अचानक उनकी नजर राइडर के हेलमेट पर लगे एक नामी कॉलेज के स्टिकर पर पड़ी. बस फिर क्या था, भारी ट्रैफिक जाम में फंसे होने के दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई जो करीब 10 मिनट तक चली. इसी बातचीत में राइडर ने बताया कि वह इसी साल कंप्यूटर साइंस में फर्स्ट डिविजन से पास आउट हुआ है, लेकिन डिग्री मिलने के दो महीने बाद भी उसके हाथ खाली हैं.
500 से ज्यादा कंपनियों में भेजा रिज्यूमे, पर कहीं से नहीं आया एक भी कॉल
युवक ने बेहद भारी मन से बताया कि उसने अब तक 500 से अधिक कंपनियों में नौकरी के लिए आवेदन (Job Applications) किया है. शुरुआत में वह हर एक एप्लिकेशन की गिनती रखता था, लेकिन बाद में रिजेक्शन और सन्नाटे का दौर ऐसा बढ़ा कि उसने गिनती करना ही छोड़ दिया. सबसे ज्यादा तकलीफदेह बात यह रही कि अधिकांश टेक कंपनियों ने उसका रिज्यूमे देखने के बाद रिप्लाई तक नहीं किया और न ही उसे किसी इंटरव्यू का मौका मिला. दो महीने तक लगातार भटकने के बाद जब उसकी पूरी जमा-पूंजी और सेविंग्स खत्म हो गईं, तो उसने सुबह 6 बजे से ही बाइक लेकर सड़कों पर निकलना शुरू कर दिया ताकि वह रोजाना का खर्च निकाल सके.
माता-पिता से छिपाया सच, बोले- 'जॉब मार्केट का हाल ही अभी ऐसा है'
इस कहानी का सबसे इमोशनल पहलू तब सामने आया जब लड़के ने बताया कि उसके माता-पिता को आज भी इस बात की भनक नहीं है कि उनका बेटा बाइक टैक्सी चला रहा है. वे यही समझते हैं कि वह घर पर रहकर ऑनलाइन इंटरव्यू की तैयारी कर रहा है. लड़का अपने माता-पिता को इस उम्र में कोई मानसिक तनाव नहीं देना चाहता. नीरज ने लिखा कि सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इतनी मुश्किलों के बावजूद उस लड़के के चेहरे पर सिस्टम को लेकर कोई शिकायत नहीं थी; वह बस यही कह रहा था कि "फिलहाल मार्केट की कंडीशन ही ऐसी है." उसका यह सकारात्मक और जुझारू रवैया नेटिजन्स को काफी प्रेरित कर रहा है.
युवाओं का आखिरी सहारा बन रही हैं 'गिग जॉब्स' (Gig Economy)
इस वायरल पोस्ट के बाद कमेंट सेक्शन में देश भर के फ्रेश ग्रेजुएट्स ने अपने-अपने कड़वे अनुभव साझा करने शुरू कर दिए हैं. कई युवाओं का कहना है कि अच्छी डिग्री और बेहतरीन स्किल्स होने के बावजूद आज के समय में एंट्री-लेवल जॉब मिलना नामुमकिन सा हो गया है. करियर एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक सेक्टर में हायरिंग (Hiring Freezes) की रफ्तार धीमी होने के कारण अब देश के युवा मजबूरी में फूड डिलीवरी, कूरियर सर्विस और बाइक टैक्सी जैसी गिग जॉब्स (Gig Jobs) को अपना रहे हैं, क्योंकि यहां तुरंत अर्निंग शुरू हो जाती है. हालांकि, यह अस्थाई विकल्प युवाओं के आत्मविश्वास के लिए एक बड़ा संकट भी है.