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April 13 2026 09:01 pm

VFX, CGI And SFX : पर्दे पर कैसे रचे जाते हैं हैरतअंगेज कारनामे? जानें फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली इन तकनीकों का अंतर

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News India Live, Digital Desk: सिनेमा की दुनिया अब केवल कैमरा और कलाकारों तक सीमित नहीं रह गई है। आज जब हम पर्दे पर किसी सुपरहीरो को उड़ते हुए देखते हैं या भीषण तबाही का मंजर देखते हैं, तो उसके पीछे आधुनिक तकनीक का हाथ होता है। अक्सर लोग VFX, CGI और SFX को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में इन तीनों में बड़ा तकनीकी अंतर है। 'बाहुबली' से लेकर 'कल्कि 2898 AD' जैसी फिल्मों की सफलता में इन तकनीकों का सबसे बड़ा योगदान रहा है। आइए समझते हैं कि ये तकनीकें कैसे काम करती हैं और आपकी पसंदीदा फिल्मों को शानदार बनाने में इनका क्या रोल है।

CGI: जब कंप्यूटर की मदद से बनाई जाती है नई दुनिया

CGI का पूरा नाम 'कंप्यूटर जनरेटेड इमेजरी' (Computer Generated Imagery) है। जैसा कि नाम से पता चलता है, इसमें जो कुछ भी आप पर्दे पर देखते हैं, वह पूरी तरह से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर द्वारा बनाया जाता है। इसमें किसी लाइव लोकेशन या कैमरे की जरूरत नहीं होती। उदाहरण के लिए, फिल्मों में दिखने वाले काल्पनिक जीव (जैसे 'अवतार' के एलियंस) या फिर पूरी तरह से डिजिटल तरीके से बनाए गए शहर CGI की देन होते हैं। यह एक तरह का डिजिटल स्कल्पटिंग है, जहां कलाकार शून्य से एक पूरी दुनिया का निर्माण करते हैं।

VFX: असली दुनिया और डिजिटल कलाकारी का मेल

VFX यानी 'विजुअल इफेक्ट्स' (Visual Effects) वह तकनीक है जहां असली शूटिंग के फुटेज को कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के साथ जोड़ा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो, जो चीजें असली कैमरे से शूट नहीं की जा सकतीं (जैसे किसी अभिनेता का उड़ना या किसी ऐतिहासिक स्मारक को गिरते हुए दिखाना), उन्हें पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान VFX की मदद से जोड़ा जाता है। CGI असल में VFX का ही एक हिस्सा है। फिल्मों में इस्तेमाल होने वाला 'ग्रीन स्क्रीन' या 'ब्लू स्क्रीन' इसी तकनीक का आधार है, जहां बाद में बैकग्राउंड बदल दिया जाता है।

SFX: कैमरे के सामने होने वाली असली हलचल

SFX का मतलब 'स्पेशल इफेक्ट्स' (Special Effects) है, और यह ऊपर दी गई दोनों तकनीकों से बिल्कुल अलग है। SFX फिल्म की शूटिंग के दौरान ही सेट पर 'लाइव' किए जाते हैं। इसमें कंप्यूटर का काम नहीं होता। उदाहरण के लिए, सेट पर नकली बारिश करवाना, छोटे धमाके करना, नकली खून का इस्तेमाल या फिर भारी मेकअप के जरिए किसी कलाकार को डरावना बनाना SFX के अंतर्गत आता है। पुरानी फिल्मों में जब तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी, तब केवल SFX का ही सहारा लिया जाता था, लेकिन आज बेहतर परिणाम के लिए SFX और VFX को मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।

भारतीय सिनेमा में बढ़ता तकनीक का क्रेज

आजकल भारतीय फिल्मों का बजट सैकड़ों करोड़ों में होता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा इन तकनीकों पर खर्च किया जाता है। 'ब्रह्मास्त्र' और हालिया रिलीज फिल्मों ने साबित कर दिया है कि भारतीय VFX कलाकार भी अब हॉलीवुड स्तर का काम कर रहे हैं। बिना इन तकनीकों के आज के दौर में बड़े पर्दे पर 'लार्जर देन लाइफ' अनुभव देना लगभग नामुमकिन है।