Varanasi in Mourning : अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर वाराणसी में शोक की लहर शिया समुदाय ने बंद की दुकानें, 7 दिनों तक मनेगा मातम
News India Live, Digital Desk: वाराणसी, जो अपनी गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जानी जाती है, आज ईरान के दिवंगत नेता की याद में डूबी हुई है। शिया बहुल इलाकों में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग सड़कों पर उतरकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
1. एक सप्ताह का आधिकारिक शोक
वाराणसी के शिया धर्मगुरुओं और अंजुमनों (धार्मिक संगठनों) ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि अयातुल्ला खामेनेई के सम्मान में 7 दिनों तक कोई भी मांगलिक या खुशी का कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा।
काले झंडे: शिया आबादी वाले क्षेत्रों जैसे दरगाह-ए-फातमान, शिवाला और भदैनी में घरों और इमामबाड़ों पर शोक के प्रतीक काले झंडे लगा दिए गए हैं।
2. दुकानें और कारोबार बंद
खामेनेई के निधन के विरोध और सम्मान में वाराणसी के कई प्रमुख बाजारों में शिया व्यापारियों ने अपनी दुकानें स्वेच्छा से बंद रखी हैं।
व्यापारियों का कहना है कि यह उनके आध्यात्मिक मार्गदर्शक के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है।
स्थानीय प्रशासन को भी इस बंद की सूचना दे दी गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
3. मातम का जुलूस (Mourning Procession)
रिपोर्ट के अनुसार, शहर के विभिन्न हिस्सों में शांतिपूर्ण शोक जुलूस निकाले जा रहे हैं।
नौहाख्वानी और सीनाज़नी: जुलूस के दौरान लोग नौहा (शोक गीत) पढ़ रहे हैं और सीनाज़नी (छाती पीटकर मातम करना) कर रहे हैं।
मजलिस का आयोजन: इमामबाड़ों में विशेष 'मजलिस' का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ खामेनेई के जीवन, उनके संघर्षों और इस्लामिक जगत में उनके योगदान पर चर्चा की जा रही है।
प्रशासनिक सतर्कता (Security Alert)
वाराणसी के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
ड्रोन से निगरानी: जुलूस के रास्तों पर ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा रही है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
अपील: धर्मगुरुओं ने युवाओं से शांति बनाए रखने और केवल धार्मिक रीति-रिवाजों तक ही सीमित रहने की अपील की है।
कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई?
अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) थे। उन्हें शिया जगत में 'मरजा' (धार्मिक मिसाल) के रूप में देखा जाता था। उनके निधन को न केवल ईरान, बल्कि पूरी दुनिया के शिया समुदाय के लिए एक बड़ी अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।