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लखनऊ कोचिंग हादसे की जांच करने वाले IAS-IPS कौन हैं? योगी सरकार ने किन पर जताया भरोसा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड (Coaching Centre Fire Accident) ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। मासूम छात्रों की सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। हादसे के तुरंत बाद एक्शन में आई योगी सरकार ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के आदेश दे दिए हैं। इस हाई-प्रोफाइल हादसे की तह तक जाने और दोषियों पर कानून का शिकंजा कसने के लिए सूबे के सबसे काबिल और कड़क छवि वाले आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों की एक स्पेशल जांच टीम को मैदान में उतारा गया है। लखनऊ से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक अब हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर वे कौन से बड़े चेहरे हैं जिन पर सीएम योगी ने इतना बड़ा भरोसा जताया है।

इन तेज-तर्रार प्रशासनिक चेहरों को सौंपी गई जांच की कमान

लखनऊ कोचिंग हादसे की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने जांच टीम में उन अधिकारियों को शामिल किया है जो कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जांच में माहिर माने जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच कमेटी की कमान लखनऊ मंडल के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (Commissioner Level) और जिले के सबसे अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपी गई है। उनके साथ कानून-व्यवस्था को बारीकी से समझने वाले उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और पुलिस कमिश्नरेट के तेज-तर्रार कप्तानों को जोड़ा गया है। इन अधिकारियों की छवि बेहद ईमानदार और बिना किसी दबाव के काम करने वाली रही है। योगी सरकार ने इन्हें पूरी छूट दी है कि वे हादसे के हर एक पहलू, चाहे वह अवैध निर्माण हो या सुरक्षा मानकों की अनदेखी, की गहराई से पड़ताल करें।

एनओसी और फायर सेफ्टी में लापरवाही की होगी फॉरेंसिक जांच

आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की यह संयुक्त जांच टीम मुख्य रूप से तीन बड़े बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। सबसे पहला सवाल यह है कि रिहायशी या कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में चल रहे इस कोचिंग सेंटर को फायर ब्रिगेड की तरफ से एनओसी (No Objection Certificate) कैसे मिली थी? दूसरा, क्या बिल्डिंग में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) और आग बुझाने वाले आधुनिक उपकरण मौजूद थे? जांच अधिकारी इस बात की भी मॉनिटरिंग कर रहे हैं कि स्थानीय विकास प्राधिकरण (LDA) और नगर निगम के किन अधिकारियों ने इस अवैध संचालन को देखकर भी आंखें मूंद रखी थीं। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने साफ निर्देश दिए हैं कि जांच की आंच चाहे जितने बड़े अधिकारी तक पहुंचे, किसी को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए।

लखनऊ समेत पूरे यूपी के कोचिंग सेंटर्स पर चला चाबुक

इस दर्दनाक हादसे के बाद केवल लखनऊ ही नहीं, बल्कि प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी और नोएडा जैसे बड़े एजुकेशनल हब में भी हड़कंप मच गया है। जांच टीम के शुरुआती इनपुट्स के आधार पर ही लखनऊ जिला प्रशासन ने शहर के अन्य सभी कोचिंग संस्थानों, हॉस्टल्स और पीजी (PG) की सघन चेकिंग शुरू कर दी है। जिन सेंटर्स में बेसमेंट के भीतर क्लासरूम चलाए जा रहे हैं या जहां वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था नहीं है, उन्हें तुरंत सील करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। छात्रों के परिजनों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार का यह कदम सराहनीय है, लेकिन अब देखना यह होगा कि यह आईएएस-आईपीएस की जोड़ी कितने दिनों में अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपती है और लखनऊ को सुरक्षित बनाने के लिए क्या कड़े कदम उठाती है।

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