post-slider

ब्रिटेन के बाद क्या भारत में भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए लगेगी पाबंदी, विशेषज्ञों ने खोल दी पोल

ब्रिटेन सरकार द्वारा 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने की चर्चा ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है। यह कदम बच्चों के मानसिक और संज्ञानात्मक विकास पर सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्प्रभाव को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ चुका है। भारत जैसे देश में, जहां डिजिटल क्रांति के साथ बच्चों का स्क्रीन टाइम तेजी से बढ़ा है, यह सवाल और भी प्रासंगिक हो गया है कि क्या बच्चों को तकनीक से पूरी तरह दूर कर देना ही सही समाधान है?

क्यों विकसित हो रहा है बच्चों के दिमाग पर 'डिजिटल खतरा'

यथार्थ हॉस्पिटल्स के न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. कुणाल बहरानी का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वे बच्चों का ध्यान खींच सकें। इसका शुरुआती संपर्क बच्चों के मस्तिष्क की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, आवेग नियंत्रण और भावनात्मक विनियमन (Emotional Regulation) पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञ चिंता जताते हैं कि उनके क्लीनिक में आने वाले बच्चों में कम एकाग्रता, नींद में गड़बड़ी और अत्यधिक चिड़चिड़ेपन जैसे लक्षण तेजी से बढ़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर डिजिटल लत से जुड़े हैं।

क्या 'पूर्ण प्रतिबंध' ही है एकमात्र रास्ता

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नेहा पंडिता का मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय 'संतुलित नियमन' (Balanced Regulation) की अधिक आवश्यकता है। बच्चों का मस्तिष्क अभी परिपक्व हो रहा होता है, इसलिए वे डिजिटल उत्तेजनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। पूर्ण बैन लगाने के बजाय माता-पिता की सक्रिय भागीदारी और बच्चों में 'डिजिटल साक्षरता' (Digital Literacy) को बढ़ावा देना ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

माता-पिता इन 6 संकेतों को न करें नजरअंदाज

डॉक्टरों के अनुसार, यदि आपके बच्चे में निम्नलिखित बदलाव दिख रहे हैं, तो समझ जाइए कि उनकी डिजिटल आदतें चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी हैं:

  • नींद में खलल: देर रात तक जागना और नींद पूरी न होना।

  • भावनात्मक अस्थिरता: छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग्स।

  • ध्यान की कमी: शैक्षणिक प्रदर्शन में लगातार गिरावट आना।

  • रुचि में कमी: ऑफ-लाइन खेल और बाहरी गतिविधियों से दूरी बनाना।

  • चिड़चिड़ापन: स्क्रीन छीनने या उपयोग कम करने के लिए कहने पर हिंसक या अत्यधिक परेशान होना।

  • एकाग्रता का अभाव: किसी भी काम में लंबे समय तक ध्यान न लगा पाना।

विशेषज्ञों के सुझाव: कैसे बनाएं डिजिटल आदतें स्वस्थ

तकनीक को पूरी तरह छोड़ना आज के समय में असंभव है, इसलिए संतुलन बनाना ही कुंजी है:

  • नो-स्क्रीन टाइम: भोजन करते समय परिवार में किसी को भी फोन का उपयोग नहीं करना चाहिए।

  • रात का नियम: सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी डिजिटल डिवाइस को बंद कर दें।

  • आयु-उपयुक्त सामग्री: बच्चा क्या देख रहा है, इस पर माता-पिता की कड़ी निगरानी जरूरी है।

  • आउटडोर एक्टिविटी: शारीरिक गतिविधियों और आमने-सामने की बातचीत (Face-to-face interaction) को प्राथमिकता दें।

Tags:

Latest Posts