आ गई तारीख! अक्टूबर के आखिर में यूपी चुनाव के लिए मैदान में उतरेंगे अमित शाह

आ गई तारीख! अक्टूबर के आखिर में यूपी चुनाव के लिए मैदान में उतरेंगे अमित शाह

देश के सबसे बड़े राजनीतिक सूबे उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है। साल 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अब अपनी रणनीतिक चालें चलनी शुरू कर दी हैं। इसी सियासी सरगर्मी के बीच देश के केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह के उत्तर प्रदेश दौरे की तारीख लगभग तय हो गई है। अक्टूबर महीने के आखिरी दिनों में अमित शाह सीधे लखनऊ की जमीन पर उतरकर पार्टी के चुनावी अभियान का औपचारिक और आक्रामक आगाज करने जा रहे हैं। उनके इस दौरे को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं और हर कोई यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आखिर इस बार बीजेपी का 'मास्टरप्लान' क्या है। खासकर राजनीतिक विश्लेषक इसे उस खास 'तीन महीने वाले गणित' और माइक्रोमैनेजमेंट से जोड़कर देख रहे हैं, जिसके लिए अमित शाह की कार्यशैली जानी जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि अक्टूबर के अंत में होने वाले इस हाई-प्रोफाइल दौरे के क्या मायने हैं और बीजेपी किस रणनीति के तहत मैदान में उतरने जा रही है।

लखनऊ में होगी बीजेपी की मेगा कार्यसमिति बैठक, अमित शाह संभालेंगे चुनावी कमान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आगामी 30 और 31 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दौरे पर रहेंगे। इस दो दिवसीय दौरे के दौरान वे उत्तर प्रदेश बीजेपी की बेहद अहम प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मुख्य रूप से शामिल होंगे। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत प्रदेश के तमाम दिग्गज नेता, क्षेत्रीय अध्यक्ष, मंत्री और संगठन के चुनिंदा पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक केवल एक औपचारिक सांगठनिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि मिशन 2027 के शंखनाद का मुख्य केंद्र बिंदु है। लोकसभा चुनावों के बाद बदले हुए राजनीतिक समीकरणों और विपक्ष की तरफ से मिल रही चुनौतियों के बीच अमित शाह का यह दौरा कार्यकर्ताओं में एक नया जोश भरने का काम करेगा। बैठक में राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए जमीनी फीडबैक लिया जाएगा और उन सीटों की विशेष समीक्षा की जाएगी जहां पिछले चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा था। शाह का यह सीधा हस्तक्षेप यह संदेश देने के लिए काफी है कि पार्टी हाईकमान चुनाव को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है।

क्या है वह '3 महीने वाला गणित' और किस रणनीति पर काम कर रही है पार्टी

राजनीतिक हलकों में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि आखिर इस पूरे अभियान के पीछे का '3 महीने वाला गणित' क्या है। दरअसल, चुनावी रणनीतिकार मानते हैं कि किसी भी बड़े चुनाव से पहले के शुरुआती और आखिरी महीने बेहद निर्णायक होते हैं। बीजेपी का यह प्लान संगठन को पूरी तरह से इलेक्टोरल मोड (चुनावी मोड) में लाने का है, जहां हर महीने के लिए अलग-अलग टारगेट तय किए जा रहे हैं। आने वाले महीनों में बूथ कमेटियों के सत्यापन, पन्ना प्रमुखों की सक्रियता और सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार को गति देने के लिए एक कड़क समयसीमा तय की गई है। इसके साथ ही, जिन सीटों पर विधायकों या स्थानीय नेताओं को लेकर जनता में नाराजगी की खबरें सामने आई हैं, वहां समय रहते बदलाव या सुधार करने के लिए भी तीन महीने का एक अहम विंडो पीरियड माना जा रहा है। अमित शाह अपने इस दौरे के जरिए पार्टी संगठन और शासन के बीच तालमेल को और अधिक मजबूत करने का गुप्त मंत्र देंगे ताकि विरोधियों के किसी भी नैरेटिव को जमीनी स्तर पर मजबूती से काटा जा सके।

विपक्ष की रणनीतियों को मात देने और जनता के बीच पकड़ मजबूत करने की तैयारी

उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल लगातार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में बीजेपी किसी भी मोर्चे पर ढीला रुख अपनाने के पक्ष में नहीं है। अमित शाह के इस दौरे का मुख्य फोकस उन नाराज या तटस्थ मतदाताओं को वापस पार्टी के पाले में लाना है जो किन्हीं कारणों से पिछले कुछ समय से दूर हुए हैं। इसके अलावा, युवाओं (जेन-जी) और महिलाओं के बीच पार्टी की पकड़ को और अधिक धार देने के लिए विशेष सामाजिक समीकरणों पर भी मंथन किया जाएगा। टिकट बंटवारे की प्रक्रिया में इस बार पूरी तरह से पारदर्शी और सर्वे-आधारित प्रणाली अपनाने के संकेत दिए जा रहे हैं, ताकि जिताऊ और टिकाऊ चेहरों को ही मैदान में उतारा जा सके। जैसे-जैसे अक्टूबर का महीना अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि अमित शाह के इस फौलादी नेतृत्व और तय किए गए 'गणित' के बाद उत्तर प्रदेश का चुनावी रण किस नए और रोचक मोड़ पर पहुंचता है।