छात्रों को न किया जाए परेशान, लेकिन छात्रों की आड़ में छिपे अपराधियों पर हो कठोर कार्रवाई केशव प्रसाद मौर्य
केशव प्रसाद मौर्य ने आज लखनऊ स्थित विधान भवन के सभागार में आगामी मानसून सत्र-2026 के सुचारु एवं शांतिपूर्ण संचालन को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश की कानून-व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव, गृह, पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कृष्ण, अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) श्री अमिताभ यश, अपर पुलिस महानिदेशक (लॉजिस्टिक्स) श्री संजीव गुप्ता, अपर पुलिस महानिदेशक (मानवाधिकार) श्री राज कुमार सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए उप मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि साइबर ठगी में संलिप्त अपराधियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साइबर थाना एवं तकनीकी इकाइयों को और अधिक सशक्त बनाते हुए पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।कांवड़ यात्रा को लेकर उन्होंने व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित, सुचारु, सुविधायुक्त एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर अफवाह फैलाने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने अथवा भ्रामक सूचना प्रसारित करने वाले तत्वों पर कड़ी निगरानी रखी जाए तथा विधि सम्मत कार्रवाई की जाए। उप मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन यातायात चालानों के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अत्यधिक अथवा अनुचित चालान की स्थिति से आमजन में शोषण अथवा असंतोष की भावना उत्पन्न न हो। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन की कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी, न्यायसंगत एवं जनहित को ध्यान में रखकर की जाए। बैठक में अयोध्या प्रकरण की भी विस्तृत समीक्षा की गई। उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रकरण की गहन एवं निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा जांच में किसी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए।