गोरखपुर गर्ल्स हॉस्टल कांड: बाथरूम के टिनशेड में ऑन मिला मोबाइल कैमरा; 'सैनिटरी पैड की निगरानी' का अजीब तर्क दे बुरी फंसी वार्डेन, छात्राओं का फूटा गुस्सा
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से छात्राओं की सुरक्षा और निजता (Privacy) को तार-तार कर देने वाला एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है। शहर के एक प्रमुख निजी गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम की छत (टिनशेड) में छुपाकर रखा गया एक स्मार्टफोन ऑन हालत में मिला, जिसका वीडियो कैमरा सीधे बाथरूम के अंदरूनी हिस्से की ओर फोकस था।
छात्राओं द्वारा इस गुप्त कैमरे को पकड़े जाने के बाद हॉस्टल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया। मामला तब और ज्यादा भड़क गया जब हॉस्टल की महिला वार्डेन ने अपनी सफाई में बेहद अजीबोगरीब और बेतुका तर्क देते हुए कहा कि कैमरा उसने खुद यह देखने के लिए लगाया था कि छात्राएं इस्तेमाल किए गए 'सैनिटरी पैड' डस्टबिन में फेंकती हैं या नहीं। वार्डेन की इस दलील ने छात्राओं और उनके परिजनों के गुस्से को और भड़का दिया।
कैसे खुला गुप्त कैमरे का राज?
हॉस्टल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं और कॉलेज की पढ़ाई करने वाली छात्राओं के अनुसार, यह घटना तब उजागर हुई जब एक छात्रा सुबह स्नान करने बाथरूम में गई:
-
नहाते समय छात्रा की नजर अचानक ऊपर टिनशेड और दीवार के बीच बने एक संकरे गैप पर पड़ी, जहां प्लास्टिक और कपड़े के बीच कुछ चमकता हुआ दिखाई दिया।
-
जब उसने गौर से देखा तो पाया कि वहां एक चालू स्मार्टफोन टिकाकर रखा गया था, जिसकी स्क्रीन ऑन थी और बैक कैमरा सीधे नीचे की तरफ वीडियो रिकॉर्डिंग मोड में एक्टिव था।
-
छात्रा ने तुरंत शोर मचाया, जिसके बाद हॉस्टल की अन्य लड़कियां वहां इकट्ठा हो गईं। छात्राओं ने हिम्मत दिखाते हुए उस मोबाइल फोन को नीचे उतारा और रिकॉर्डिंग को सुरक्षित करते हुए तुरंत वार्डन से जवाब मांगा।
वार्डेन का अजीब तर्क: 'सैनिटरी पैड चेक करने के लिए लगाया था फोन'
जब छात्राओं ने रंगे हाथों पकड़े गए फोन को लेकर हॉस्टल वार्डेन को घेरा, तो उसके दिए गए जवाब ने सभी को स्तब्ध कर दिया:
-
वार्डेन ने कैमरे की बात स्वीकार करते हुए सफाई दी कि हॉस्टल के वॉशरूम में छात्राएं सैनिटरी पैड सही तरीके से डिस्पोज नहीं करती थीं और पाइपलाइन चोक हो जाती थी, इसलिए वह केवल यह 'निगरानी' रखना चाहती थी कि कौन सी छात्रा गंदगी फैला रही है।
-
छात्राओं ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए सवाल उठाया कि किसी भी स्थिति में महिलाओं के निजी बाथरूम के भीतर कैमरा लगाना पूरी तरह गैरकानूनी, अनैतिक और घिनौना कृत्य है। छात्राओं को आशंका है कि यह कोई निगरानी नहीं, बल्कि आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करके उन्हें ब्लैकमेल करने या किसी ऑनलाइन नेटवर्क पर लीक करने की सोची-समझी साजिश हो सकती है।
सड़क पर उतरीं छात्राएं, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
घटना के बाद हॉस्टल की दर्जनों छात्राएं सड़क पर उतर आईं और हॉस्टल प्रबंधन व वार्डेन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के आला अधिकारी और महिला पुलिस बल मौके पर पहुंचे।
-
मोबाइल जब्त, फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा: पुलिस ने मौके से टिनशेड में मिले मोबाइल फोन को तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया है।
-
डेटा रिकवरी और क्लाउड बैकअप की जांच: पुलिस की साइबर क्राइम टीम फोन की जांच कर रही है कि उसमें अब तक कितने वीडियो रिकॉर्ड किए गए, क्या कोई वीडियो किसी व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल या क्लाउड स्टोरेज पर अपलोड किया गया है, और क्या पहले से कोई फुटेज डिलीट की गई है।
-
मुकदमा दर्ज: पुलिस ने छात्राओं की तहरीर के आधार पर आरोपी वार्डेन और हॉस्टल संचालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं (ताक-झांक/Voyeurism और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने) तथा आईटी एक्ट (IT Act) की संबंधित गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
अभिभावकों में भारी आक्रोश, हॉस्टलों के ऑडिट की मांग
इस घटना ने शहर के तमाम हॉस्टलों और पीजी (PG) में अपनी बेटियों को रखकर पढ़ाने वाले अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। अभिभावकों का कहना है कि जहां बेटियां खुद को सबसे सुरक्षित समझती हैं, वहीं अगर इस तरह की घिनौनी हरकतें होंगी, तो बच्चियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। स्थानीय सामाजिक संगठनों और छात्र संघों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शहर के सभी निजी गर्ल्स हॉस्टल्स और लॉज का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किया जाए और वहां सुरक्षा मानकों व कैमरों की स्थिति का कड़ा ऑडिट कराया जाए।