मेरे विभाग में कार्य के प्रति लापरवाही, जनता के हितों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर होगी कठोरतम कार्रवाई, केशव प्रसाद मौर्य
केशव प्रसाद मौर्य ने आज अपने सरकारी आवास 7, कालिदास मार्ग, लखनऊ में ग्राम्य विकास विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सौरभ बाबू, ग्राम्य विकास आयुक्त श्री जी.एस. प्रियदर्शी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, बैठक में उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्राम्य विकास विभाग प्रदेश के ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन तथा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का प्रमुख माध्यम है। इसलिए विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लापरवाही अथवा उदासीनता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जनता को योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण तरीके से उपलब्ध कराना प्रत्येक अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवास योजना से संबंधित कागजी प्रक्रिया को सरल बनाया जाए तथा सभी विभागीय अनुमतियां एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने के लिए नोडल डेस्क की स्थापना की जाए। उन्होंने आवेदन से लेकर भौतिक सत्यापन एवं स्वीकृति तक की संपूर्ण प्रक्रिया के लिए 15 से 30 दिन की निश्चित समय-सीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत एवं विकास खण्ड स्तर पर विशेष शिविर आयोजित कर पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों एवं आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी आमजन तक पहुंचाई जाए। साथ ही पोर्टल पर आधार कार्ड के माध्यम से डेटा का स्वतः सत्यापन सुनिश्चित किया जाए, जिससे नाम एवं अन्य विवरणों में होने वाली डेटा मिसमैच की समस्या समाप्त हो सके। श्री मौर्य ने निर्देश दिए कि योजनाओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ग्राम स्तर पर नियमित सोशल ऑडिट कराया जाए तथा वीबीजी-रामजी योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना एवं मुख्यमंत्री आवास योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार मीडिया एवं जनसंपर्क माध्यमों से किया जाए ताकि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं की जानकारी पहुंच सके।
बैठक में प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने दो टूक कहा कि "मेरे विभाग में कार्य के प्रति लापरवाही, अरुचि अथवा सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों के प्रति नकारात्मक मानसिकता रखने वाले अधिकारियों के लिए कोई स्थान नहीं है। जनता के हितों से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक अधिकारी पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करें, ताकि प्रदेश के ग्रामीणों को सरकार की प्रत्येक योजना का लाभ समय पर और पूरी ईमानदारी से मिल सके।"