एनकाउंटर कैसे होता है मुझे सब पता है...' डिंपल यादव के सुर में सुर मिलाते नजर आए मंत्री संजय निषाद
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिसिया एनकाउंटर की नीति को लेकर अक्सर विपक्ष सरकार पर हमलावर रहता है। लेकिन इस बार सूबे की सियासत में एक ऐसा चौंकाने वाला मोड़ आया है जिसने सबको सन्न कर दिया है। भदोही में हुए चर्चित कमलेश बिंद एनकाउंटर मामले को लेकर योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद अपनी ही सरकार और पुलिस महकमे के खिलाफ खुलकर खड़े हो गए हैं। इस संवेदनशील और बड़े मुद्दे पर मंत्री संजय निषाद का रुख पूरी तरह से समाजवादी पार्टी की फायरब्रांड नेता और सांसद डिंपल यादव के स्टैंड से मिलता-जुलता नजर आ रहा है। संजय निषाद ने उत्तर प्रदेश पुलिस की इस कार्रवाई को पूरी तरह से संदेहास्पद बताते हुए एक बेहद बेबाक बयान दे डाला है, जिससे सरकार के भीतर और बाहर खलबली मच गई है।
मुझे अच्छे से पता है कि पुलिस एनकाउंटर कैसे करती है कमलेश बिंद एनकाउंटर मामले पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने मीडिया के सामने बेहद तीखे और सनसनीखेज शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि एनकाउंटर कैसे होता है और पुलिस इसे किस तरह अंजाम देती है, यह उन्हें बहुत अच्छे तरीके से पता है। संजय निषाद ने साफ तौर पर इशारा किया कि इस मामले की हकीकत वैसी नहीं है जैसी पुलिस की थ्योरी में बताई जा रही है। उन्होंने इस पूरी घटना को अपनी बिरादरी के एक युवक के साथ अन्याय करार देते हुए पुलिस अधिकारियों की मंशा पर सीधे उंगली उठा दी है।
अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव के साथ खड़े दिखे सरकार के मंत्री इस पूरे विवाद की सबसे दिलचस्प और बड़ी बात यह है कि जहां पूरी भाजपा और सरकार इस एनकाउंटर को अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी बता रही है, वहीं संजय निषाद इस मुद्दे पर सपा सांसद डिंपल यादव के पाले में खड़े दिखाई दे रहे हैं। डिंपल यादव ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की थी। अब संजय निषाद ने भी डिंपल यादव के उन्हीं आरोपों को एक तरह से बल दे दिया है, जिससे यूपी के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या निषाद पार्टी आगामी चुनावी समीकरणों को देखते हुए अपने लिए नया रास्ता तलाश रही है।
अपनी ही पुलिस पर सवाल उठाने के पीछे क्या है बड़ी सियासी मजबूरी राजनीतिक पंडितों का मानना है कि संजय निषाद का यह कदम किसी बड़ी सियासी मजबूरी या जातीय समीकरणों को साधने का नतीजा है। कमलेश बिंद निषाद समाज से ताल्लुक रखता था और संजय निषाद की पूरी राजनीति इसी समाज के वोट बैंक पर टिकी हुई है। अपनी ही सरकार की पुलिस पर सवाल उठाकर संजय निषाद अपने वोटर्स को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे अपनी बिरादरी के हितों के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें सरकार के लाइन के खिलाफ ही क्यों न जाना पड़े। इस बगावती तेवर के बाद अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा आलाकमान अपने इस सहयोगी दल के नेता के बयान पर क्या एक्शन लेता है।