गोरखपुर में शिक्षक दिवस का भव्य जलसा: सीएम योगी 81 शिक्षकों को करेंगे राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार से सम्मानित, 2 साल का सेवा विस्तार और आजीवन मुफ्त बस यात्रा का मिलेगा तोहफा
उत्तर प्रदेश की शैक्षणिक विकास यात्रा में 5 सितंबर का शिक्षक दिवस एक नया ऐतिहासिक अध्याय जोड़ने जा रहा है। अब तक पारंपरिक रूप से राजधानी लखनऊ में आयोजित होने वाला राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह इस बार पूर्वांचल के प्रमुख केंद्र गोरखपुर में भव्य पैमाने पर आयोजित किया जा रहा है। गोरखपुर के आधुनिक योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बतौर मुख्य अतिथि प्रदेश भर के चयनित 81 कर्मठ और नवाचारी शिक्षकों को सम्मानित करेंगे। यह पहला अवसर है जब शिक्षा जगत के इस सर्वोच्च राज्य सम्मान का मंच राजधानी से बाहर किसी अन्य जिले में सजाया गया है, जिसे लेकर गोरखपुर सहित पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।
प्रशासन ने इस पूरे आयोजन को अभूतपूर्व बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की हैं। दूर-दराज के जिलों से आने वाले सम्मानित शिक्षकों के लिए विशेष प्रोटोकॉल लागू किया गया है ताकि समाज के इन राष्ट्र निर्माताओं को वह आदर और सम्मान मिल सके जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।
81 शिक्षकों का सम्मान: 76 को राज्य अध्यापक और 5 को मुख्यमंत्री पुरस्कार
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस वर्ष राज्य भर से कड़े मूल्यांकन और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के बाद 81 शिक्षकों का चयन किया गया है। इन सम्मानित होने वाले गुरुजनों को दो प्रमुख श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जा रहे हैं। समारोह में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के कुल 76 उत्कृष्ट शिक्षकों को 'राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025' से नवाजा जाएगा। इनमें बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों से 61 शिक्षक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों से 15 शिक्षक शामिल हैं।
इसके अलावा, स्ववित्तपोषित (प्राइवेट व अनएडेड) माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य को नई दिशा देने वाले 5 कर्मठ शिक्षकों को 'मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025' से सम्मानित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि निजी व वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के योगदान को पहचान देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2018 में इस विशेष मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार की शुरुआत की थी। इस वर्ष के चयन में आधी आबादी यानी महिला शिक्षकों की भागीदारी भी बेहद प्रेरणादायक है; कुल 81 चयनित शिक्षकों में 33 महिला शिक्षिकाएं शामिल हैं, जिनमें बेसिक शिक्षा की 31 और माध्यमिक शिक्षा की 2 शिक्षिकाएं शामिल हैं।
25 हजार नगद, 2 साल का सेवा विस्तार और आजीवन मुफ्त रोडवेज सफर का तोहफा
उत्तर प्रदेश सरकार ने सम्मानित होने वाले शिक्षकों के लिए सम्मान राशि के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण दीर्घकालिक सुविधाओं की घोषणा की है। राज्य अध्यापक पुरस्कार और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार से अलंकृत होने वाले प्रत्येक शिक्षक को मंच पर मुख्यमंत्री के कर-कमलों से एक प्रशस्ति पत्र, विशेष स्मृति चिन्ह और 25 हजार रुपये की एकमुश्त सम्मान राशि का चेक प्रदान किया जाएगा।
आर्थिक प्रोत्साहन के साथ-साथ इन शिक्षकों को प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा सम्मान दिया जा रहा है। राज्य अध्यापक पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की आयु सीमा में दो वर्ष की वृद्धि (सेवा विस्तार) का लाभ मिलेगा, जिससे वे अपने अनुभव का लाभ दो अतिरिक्त वर्षों तक विद्यार्थियों और विद्यालय प्रबंधन को दे सकेंगे। इसके साथ ही, सम्मानित शिक्षकों को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की साधारण और वातानुकूलित बसों में आजीवन प्रतिवर्ष 4,000 किलोमीटर तक पूरी तरह से निःशुल्क यात्रा की आधिकारिक पास सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। सरकार का मानना है कि ऐसे नीतिगत प्रोत्साहन शिक्षकों के सामाजिक सम्मान को पुनर्स्थापित करने और उनके कार्य के प्रति आदर भाव प्रकट करने का सशक्त माध्यम हैं।
विशिष्ट अतिथियों की तरह आवभगत, गोरखपुर में गुरुजनों का शाही सत्कार
गोरखपुर की धरती पर पधारे इन राज्य स्तरीय विभूतियों के स्वागत और ठहराव के लिए जिला प्रशासन और बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विशेष प्रबंध किए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर से लेकर बुंदेलखंड के झांसी, महोबा, ललितपुर और पूर्वांचल के बलिया, गाजीपुर, वाराणसी तक से पहुंचे सभी शिक्षकों को गोरखपुर के प्रतिष्ठित होटलों में वीआईपी (विशिष्ट अतिथि) दर्जे के साथ ठहराया गया है। प्रत्येक शिक्षक के साथ एक स्थानीय संपर्क अधिकारी (लाइजनिंग ऑफिसर) नियुक्त किया गया है, जो उनके आवागमन, खानपान और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने की व्यवस्था देख रहे हैं।
समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंच पर माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी और बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी मौजूद रहेंगे और शिक्षकों को संबोधित करेंगे। इसके अतिरिक्त प्रदेश के मत्स्य विकास मंत्री डॉ. संजय निषाद, गोरखपुर के सांसद रविकिशन, जिले के सभी विधायक, महापौर और शिक्षा जगत से जुड़ी शीर्ष प्रशासनिक हस्तियां इस भव्य कार्यक्रम की गवाह बनेंगी। प्रेक्षागृह परिसर को फूलों, रंगोली और शिक्षा से जुड़े प्रेरणादायक स्लोगनों से सजाया गया है।
कक्षा में नवाचार और छात्रों के सर्वांगीण विकास को मिला सम्मान का आधार
इस पुरस्कार के लिए शिक्षकों का चयन केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं, बल्कि कक्षा में उनके द्वारा किए गए जमीनी नवाचारों और विद्यालय के कायाकल्प के आधार पर किया गया है। चयनित शिक्षकों में कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपने निजी प्रयासों से सरकारी विद्यालयों को निजी कॉन्वेंट स्कूलों से भी बेहतर बना दिया है। किसी शिक्षक ने खेल-खेल में गणित और विज्ञान की जटिल अवधारणाओं को समझाने के लिए मॉडल लैब तैयार की, तो किसी ने 'वेस्ट टू वंडर' तकनीक से बेकार पड़ी वस्तुओं से शिक्षण अधिगम सामग्री (TLM) बनाई।
कई शिक्षिकाओं ने बालिकाओं के शत-प्रतिशत नामांकन और ड्रॉप-आउट दर को शून्य करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। प्रयागराज, लखीमपुर खीरी, झांसी, गाजियाबाद और बरेली के जिन 5 प्रधानाचार्यों व प्रवक्ताओं को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए चुना गया है, उन्होंने डिजिटल स्मार्ट क्लास, रोबोटिक्स, पर्यावरण संरक्षण और छात्र-छात्राओं के समग्र व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। इस सम्मान के माध्यम से सरकार प्रदेश के अन्य सभी लाखों शिक्षकों को यह कड़ा संदेश दे रही है कि जो शिक्षक ईमानदारी और समर्पण से नौनिहालों के भविष्य को संवारेगा, उसे सर्वोच्च मंच पर सम्मानित किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आया बुनियादी बदलाव और भविष्य का विजन
बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश की बुनियादी और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था ने आमूलचूल परिवर्तन देखा है। 'ऑपरेशन कायाकल्प' के जरिए प्रदेश के 1.35 लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बाउंड्री वॉल, शुद्ध पेयजल, बालक-बालिका पृथक शौचालय, टाइलीकरण, विद्युत संयोजन और स्मार्ट क्लास जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं। इसके अतिरिक्त 'पीएम श्री' योजना के तहत चयनित विद्यालयों को आधुनिक तकनीक और समग्र विकास के मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
गोरखपुर में आयोजित यह राज्य शिक्षक पुरस्कार समारोह इस बात का प्रमाण है कि सरकार केवल बुनियादी ढांचे के विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि उस ढांचे की असली आत्मा यानी शिक्षक के सम्मान और उसकी कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। शिक्षकों के प्रशिक्षण, निपुण भारत मिशन के तहत बुनियादी साक्षरता व संख्यात्मक ज्ञान (FLN) के लक्ष्यों को प्राप्त करने और पारदर्शी शिक्षक स्थानांतरण नीति ने शिक्षा के वातावरण को सकारात्मक दिशा दी है। गोरखपुर का यह आयोजन प्रदेश भर के परिषदीय और माध्यमिक शिक्षकों के भीतर एक नई ऊर्जा, गौरव और राष्ट्र निर्माण के प्रति दायित्वबोध का संचार करेगा।