ला रेजिडेंशिया में उल्लू का खौफ: अंधेरा होते ही सिर पर झपट्टा मार लहूलुहान कर रहा शिकारी पक्षी, 6 घायल, वन विभाग से गुहार
ग्रेटर नोएडा वेस्ट (नोएडा एक्सटेंशन) स्थित हाईराइज सोसाइटी 'ला रेजिडेंशिया' में इन दिनों एक अजीबोगरीब और खौफनाक मामला सामने आया है। आमतौर पर शांत और इंसानों से दूरी बनाकर रहने वाला उल्लू यहां के निवासियों के लिए सिरदर्द और डर का दूसरा नाम बन चुका है। शाम ढलते ही सोसाइटी परिसर में टहलने निकलने वाले लोगों पर एक उल्लू अचानक आसमान से डाइव लगाकर हमला कर रहा है। पिछले कुछ दिनों के भीतर इस रहस्यमयी और आक्रामक पक्षी के हमले में सोसाइटी के करीब 5 से 6 लोग गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हो चुके हैं। इस अप्रत्याशित खतरे ने पूरी सोसाइटी के लोगों को शाम के वक्त घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।
अंधेरा घिरते ही शुरू होता है उल्लू का खौफनाक शिकार
सोसाइटी के निवासियों के अनुसार, यह घटनाक्रम अमूमन शाम ढलने और रात के अंधेरे में तब्दील होने के दौरान सामने आ रहा है। लोग जब दफ्तर से लौटकर या खाना खाने के बाद सेंट्रल पार्क, पोडियम या टावरों के नीचे टहलने निकलते हैं, तभी अचानक ऊपर से हवा चीरती हुई एक परछाई आती है और सीधे लोगों के सिर या चेहरे को निशाना बनाती है। उल्लू के नुकीले पंजों और चोंच के सीधे वार से कई लोगों के सिर की त्वचा फट गई और खून बहने लगा। अचानक होने वाले इस हवाई हमले से संभलने तक का मौका नहीं मिलता, जिससे लोग बुरी तरह सहम गए हैं।
बच्चों और बुजुर्गों का बाहर निकलना हुआ बंद
इस लगातार बढ़ रहे हमले के कारण ला रेजिडेंशिया सोसाइटी के परिवारों में भारी दहशत का माहौल है। माता-पिता ने डर के मारे बच्चों को शाम के समय सोसाइटी के प्ले एरिया और पार्कों में भेजना पूरी तरह बंद कर दिया है। बुजुर्ग, जो रोजाना शाम को ताजी हवा के लिए बैठते थे, वे भी बालकनी या फ्लैट्स में बंद रहने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि अगर किसी को जरूरी काम से एक टावर से दूसरे टावर या बेसमेंट की तरफ जाना भी पड़ रहा है, तो वे छाता तानकर या लाठी-डंडे हाथ में लेकर सिर बचाते हुए निकल रहे हैं।
उल्लू के असामान्य और हिंसक व्यवहार के पीछे क्या है वजह
पक्षी विशेषज्ञों और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स का मानना है कि उल्लू स्वाभाविक रूप से इंसानों पर हमला नहीं करते। उनके इस तरह बेहद आक्रामक होने के पीछे मुख्य रूप से दो प्रमुख वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं:
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अंडों या बच्चों की सुरक्षा: संभव है कि सोसाइटी के किसी घने पेड़, बालकनी के डक्ट, एसी कंप्रेसर के पास या निर्माण स्थल के ऊंचे कोने पर उल्लू का घोंसला हो, जहां उसके अंडे या छोटे बच्चे हों। पक्षी अपनी संतानों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक संवेदनशील होते हैं और किसी भी आहट को खतरा मानकर हमलावर हो जाते हैं।
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तेज आर्टिफिशियल लाइट्स और भटकाव: हाईराइज सोसायटियों में रात के वक्त जलने वाली तेज एलईडी और फ्लड लाइट्स की वजह से रात में सक्रिय रहने वाले पक्षी दृष्टि भ्रम और अत्यधिक तनाव (Stress) का शिकार हो जाते हैं, जिससे उनका व्यवहार असंतुलित और हिंसक हो जाता है।
घायल निवासियों ने बयां किया आंखों देखा खौफ
हमले का शिकार हुए एक पीड़ित निवासी ने बताया कि वह सामान्य रूप से फोन पर बात करते हुए वॉक कर रहे थे। उन्हें किसी चीज के उड़ने की आवाज तक नहीं आई, क्योंकि उल्लू के पंखों की बनावट साइलेंट फ्लाइट वाली होती है। सीधे उनके सिर के पिछले हिस्से पर पंजों से तेज प्रहार हुआ। जब उन्होंने हाथ लगाया तो सिर से तेजी से खून बह रहा था। आनन-फानन में उन्हें पास के क्लिनिक ले जाया गया जहां एंटी-रेबीज, टेटनस और ड्रेसिंग करानी पड़ी। इसी तरह सोसाइटी के अन्य 4-5 लोगों को भी सिर और चेहरे पर गहरे खरोंच और कट लगे हैं।
मेंटेनेंस टीम की नाकामी और वन विभाग से रेस्क्यू की गुहार
शुरुआत में सोसाइटी की मेंटेनेंस और सुरक्षा टीम ने अपने स्तर पर टार्च जलाकर और पेड़ों की शाखाओं की जांच कर उल्लू को भगाने की कोशिश की, लेकिन अंधेरे में छिपने की उसकी काबिलियत के आगे वे नाकाम रहे। इसके बाद सोसाइटी के एओए (AOA) और स्थानीय निवासियों ने गौतमबुद्ध नगर वन विभाग (Forest Department) को आधिकारिक रूप से सूचना देकर तत्काल मदद की गुहार लगाई है। निवासियों की मांग है कि वन विभाग की एक्सपर्ट रेस्क्यू टीम तुरंत जाल और आवश्यक उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे, घोंसले या पक्षी को सुरक्षित ट्रैक करे और उसे पकड़कर किसी सुरक्षित जंगल या प्राकृतिक पर्यावास में छोड़े।
जब तक न पकड़े जाएं तब तक बरतें ये जरूरी सावधानियां
वन्यजीव विशेषज्ञों और सुरक्षा अधिकारियों ने सोसाइटी के लोगों को उल्लू के पकड़े जाने तक निम्नलिखित एहतियात बरतने की सलाह दी है:
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रात या देर शाम को खुले पोडियम और पेड़ों के झुंड के पास अकेले वॉक करने से पूरी तरह परहेज करें।
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बाहर निकलते समय सिर पर हेलमेट, मोटी टोपी (Cap) या छाते का इस्तेमाल सुरक्षा ढाल के रूप में जरूर करें ताकि सिर और आंखों का बचाव हो सके।
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उल्लू को पत्थर मारकर या किसी धारदार चीज से चोट पहुंचाने की कोशिश न करें, क्योंकि वह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) के तहत संरक्षित जीव है और छेड़ने पर वह और ज्यादा हिंसक हो सकता है।
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यदि उल्लू किसी डक्ट या पेड़ पर बैठा दिखाई दे तो तुरंत टॉर्च या मोबाइल की तेज लाइट उसकी आंखों पर न मारें और मेंटेनेंस या वन विभाग को सटीक लोकेशन की जानकारी दें।