Uttar Pradesh Politics : अतीक अहमद के नाम पर सपा विधायक रागिनी सोनकर और पूजा पाल में जुबानी जंग
- by Archana
- 2025-08-16 14:09:00
News India Live, Digital Desk: Uttar Pradesh Politics : समाजवादी पार्टी की एमएलए रागिनी सोनकर और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुई पूर्व विधायक पूजा पाल के बीच माफिया अतीक अहमद के नाम पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली है. यह राजनीतिक बयानबाजी उस वक्त सामने आई जब पूजा पाल, जिनके पति राजू पाल की 2005 में हत्या कर दी गई थी, रागिनी सोनकर पर माफिया डॉन अतीक अहमद को उनके पिता की "विरासत" बताने पर भड़क गईं.
दरअसल, इस बहस की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक वीडियो से हुई, जिसमें सपा एमएलए रागिनी सोनकर कथित तौर पर यह कहते हुए दिख रही हैं कि 'अतीक अहमद उनके (भाजपा के) पिताजी की विरासत है.' इस टिप्पणी पर पूर्व विधायक पूजा पाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी. पूजा पाल, जो प्रयागराज के तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की पत्नी हैं, जिनके हत्याकांड में अतीक अहमद और उसके गैंग का नाम सामने आया था, इस टिप्पणी से बेहद नाराज़ दिखीं.
पूजा पाल ने सीधे तौर पर रागिनी सोनकर पर निशाना साधते हुए कहा, "रागिनी सोनकर जी का वीडियो देखा है हमने, और आप अपने पिता का नाम रोशन करतीं तो अच्छा होता. अतीक तुम्हारे पिताजी की विरासत है." इसके साथ ही पूजा पाल ने समाजवादी पार्टी की नीतियों और उस दल के प्रति सवाल उठाते हुए कहा कि 'ऐसी शिक्षा कहाँ मिलती है समाजवादी पार्टी के लोग ये बताएं. इस बात का उन्हें जवाब देना होगा.' (संदर्भ) उन्होंने यह भी कहा कि "अगर माफिया अतीक अहमद विरासत है, तो यह आपकी विरासत है. हमारे पति राजू पाल ने उन्हें रोकने का काम किया था." इस बयानबाजी ने राजनीतिक गलियारों में गरमागरही बढ़ा दी है, खासकर उत्तर प्रदेश में जहाँ mafia के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी रहते हैं.
इस पूरे मामले से एक बार फिर प्रयागराज का वह विवादित अतीत सुर्खियों में आ गया है, जहाँ अतीक अहमद का एक समय में दबदबा था. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार माफियाओं और अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का दावा करती रही है, और अतीक अहमद जैसे माफियाओं पर उनके शिकंजे ने एक कड़ा संदेश दिया है. वहीं, विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधने की कोशिश करता है, जिससे राजनीति में ऐसी व्यक्तिगत टिप्पणियां सामने आती रहती हैं. इस जुबानी जंग से यह साफ है कि आने वाले समय में भी अतीक अहमद का मुद्दा और विरासत पर बहस राजनीतिक अखाड़े में सक्रिय रहेगी.
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