US Nuclear Security : पागल शासन के हाथ में नहीं रहने देंगे परमाणु बम, अमेरिका की इस देश को सीधी चेतावनी मच गया हड़कंप
News India Live, Digital Desk: दुनिया में बढ़ते परमाणु खतरे के बीच अमेरिका ने एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। अमेरिका ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि वह दुनिया के सबसे 'सनकी और पागल शासन' (Crazy Regime) को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। व्हाइट हाउस की ओर से जारी इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है, जिसे सीधे तौर पर ईरान या उत्तर कोरिया जैसे देशों के लिए एक बड़े अल्टीमेटम के रूप में देखा जा रहा है।
"विश्व शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा"
अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि कुछ ऐसे देश हैं जिनका नेतृत्व अस्थिर और आक्रामक है। अगर ऐसे शासन के पास परमाणु ताकत आती है, तो यह केवल क्षेत्र के लिए नहीं बल्कि पूरी मानवता के लिए विनाशकारी होगा।
सुरक्षा घेरा: अमेरिका ने साफ किया है कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ऐसी तकनीक और यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) को रोकने के लिए हर संभव सैन्य और कूटनीतिक कदम उठाएगा।
प्रतिबंधों की मार: अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि जो देश अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करेंगे, उन पर और भी कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
ईरान पर टिकी हैं निगाहें
माना जा रहा है कि अमेरिका का यह तीखा बयान मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। हाल के दिनों में ऐसी खबरें आई थीं कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों पर यूरेनियम को उच्च स्तर तक संवर्धित कर रहा है। इजरायल और अमेरिका दोनों ही ईरान के परमाणु संपन्न होने को अपनी सुरक्षा के लिए 'रेड लाइन' मानते हैं।
इजरायल के साथ बढ़ती जुगलबंदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा और वहां के नेतृत्व के साथ चर्चाओं के बीच, अमेरिका का यह बयान क्षेत्र में नई समीकरणों को जन्म दे सकता है। इजरायल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी देश के परमाणु ठिकानों पर हमला करने से पीछे नहीं हटेगा, और अब उसे अमेरिका का खुला समर्थन मिलता दिख रहा है।
क्या छिड़ेगा नया युद्ध?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह भाषा किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई का संकेत हो सकती है। "पागल शासन" (Crazy Regime) जैसे शब्दों का इस्तेमाल यह दिखाता है कि अब बातचीत का दौर खत्म हो रहा है और कार्रवाई का समय नजदीक है। अगर तनाव और बढ़ा, तो मध्य पूर्व (Middle East) में एक नया युद्ध छिड़ने का खतरा मंडरा रहा है।