अमेरिका-चीन में फिर छिड़ी व्यापारिक जंग, भारत के लिए खुल सकता है खजाना

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US-China trade war impact on India : दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों, अमेरिका और चीन, के बीच व्यापारिक लड़ाई एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। चीन के एक नए कदम ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है, लेकिन इस तनातनी के बीच भारत के लिए एक सुनहरा दरवाजा खुलता दिख रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 100% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी दी है, जो 1 नवंबर से लागू हो सकता है। यह एक्शन चीन के उस फैसले के जवाब में है, जिसमें उसने 'रेयर अर्थ मिनरल्स' के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं।

क्या है ये 'रेयर अर्थ मिनरल्स' का खेल?

ये वो खनिज हैं जो हमारे मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक गाड़ियों से लेकर लड़ाकू विमानों और मिसाइलों तक, हर इलेक्ट्रॉनिक चीज के लिए बेहद जरूरी हैं। और इस खजाने की 70% से ज्यादा चाबियां अकेले चीन के पास हैं। चीन ने अब फैसला किया है कि वह इन खनिजों को आसानी से किसी को नहीं बेचेगा, जिससे अमेरिका की टेंशन बढ़ गई है।

इस लड़ाई में भारत की लॉटरी कैसे लग सकती है?

नई दिल्ली के एक थिंक टैंक, ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI), का मानना है कि यह स्थिति भारत के लिए एक बड़े मौके की तरह है।

  • अमेरिका को है नए दोस्त की तलाश: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, "चीन के इस कदम ने अमेरिका को अपनी रणनीति पर फिर से सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। वह अब चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए भारत जैसे भरोसेमंद साथियों की तलाश कर रहा है।"
  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील को मिलेगी रफ्तार:अमेरिका अब भारत के साथ व्यापार समझौते में तेजी ला सकता है। GTRI का अनुमान है कि अमेरिका भारत पर लगने वाले 50% के भारी-भरकम टैरिफ को घटाकर 16-18% तक कर सकता है।

इस खबर का असर बाजार पर भी दिखा है, जहां भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत हुआ है।

लेकिन भारत को रहना होगा सावधान

GTRI ने भारत को सलाह दी है कि इस मौके का फायदा उठाते हुए भी उसे अपने हितों की रक्षा करनी चाहिए। अजय श्रीवास्तव ने कहा, "भारत को कृषि, डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स जैसे मामलों में अपनी लक्ष्मण रेखाएं बनाए रखनी चाहिए।" उन्होंने याद दिलाया कि व्यापार समझौते हमेशा के लिए नहीं होते, ठीक वैसे ही जैसे ट्रंप ने चीन के साथ हुए पिछले समझौते को रद्द करके नए टैरिफ लगा दिए।

"टैरिफ किंग" से "सबसे बड़ा दोस्त" बना भारत

इस तनाव के बीच अमेरिका का भारत के प्रति बदला हुआ रवैया भी साफ दिख रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, जो पहले भारत को 'टैरिफ किंग' कह चुके हैं, अब उसे एक 'प्रमुख लोकतांत्रिक सहयोगी' बता रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह लड़ाई दुनिया बनाम चीन है। हमें भारत और यूरोपीय देशों से समर्थन की उम्मीद है।"

यह सब तब हो रहा है जब भारतीय अधिकारियों की एक टीम पहले ही बातचीत के लिए वाशिंगटन पहुंच चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, बैठकों में रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए नए रास्ते बनाने, टैरिफ घटाने और लंबी दोस्ती की नींव रखने पर चर्चा हो रही है।

यह व्यापार युद्ध दुनिया के व्यापार का नक्शा बदल सकता है। अब सवाल यह है कि क्या भारत इस मौके का फायदा उठाकर विश्व व्यापार में अपनी एक नई और मजबूत जगह बना पाएगा? इसका जवाब आने वाले कुछ हफ्तों में मिल जाएगा।