बांग्लादेश में बवाल दीपू दास की हत्या पर UN ने तोड़ी चुप्पी, सख्त जांच की उठी मांग

Post

News India Live, Digital Desk : आप सब जानते हैं कि हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में पिछले कुछ दिनों से जो कुछ भी हो रहा है, उसने हर किसी को परेशान कर दिया है। आए दिन वहां से हिंसा और तोड़फोड़ की खबरें आ रही हैं, लेकिन हाल ही में जो हुआ, उसने दुनिया की सबसे बड़ी संस्था 'संयुक्त राष्ट्र' (UN) का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। मामला इस्कॉन (ISKCON) से जुड़े एक विवाद और उसके बाद हुई हिंसा का है।

दीपू दास की हत्या पर गहराया विवाद

दरअसल, पूरी दुनिया में बवाल तब मचा जब खबर आई कि चटगांव (Chittagong) में हिंसा के दौरान 'दीपू दास' नाम के एक शख्स की हत्या कर दी गई। यह घटना तब हुई जब लोग इस्कॉन के पूर्व नेता चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। दीपू दास की मौत ने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया।

इस दर्दनाक घटना पर अब UN ने सख्त रुख अपनाया है। UN के मानवाधिकार प्रमुख, वोल्कर तुर्क (Volker Turk) ने इस पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि हिंसा किसी भी समस्या का हल नहीं है और जिस तरह से वहां अल्पसंख्यकों और प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया जा रहा है, वह गलत है।

UN ने क्या मांग की है?

UN ने साफ शब्दों में कहा है कि दीपू दास की हत्या की "स्वतंत्र जांच" होनी चाहिए। मतलब, जांच ऐसी हो जिसमें कोई भेदभाव न हो और सच सामने आए। वोल्कर तुर्क ने बांग्लादेश सरकार और वहां के लोगों से अपील की है कि वे संयम बनाए रखें। उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों (Minorities) की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

क्यों हो रहा है विरोध?

यह सारा हंगामा तब शुरू हुआ जब चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी को देशद्रोह के आरोप में ढाका एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। उनके समर्थक उनकी रिहाई की मांग कर रहे थे, लेकिन देखते ही देखते प्रदर्शन हिंसक हो गया। पत्थरबाजी हुई, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और इसी बीच दीपू दास की जान चली गई।

यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर काफी गुस्सा देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि UN के इस बयान के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार क्या कदम उठाती है।

हर कोई यही चाहता है कि शांति बनी रहे और बेगुनाह लोगों को अपनी जान न गंवानी पड़े। अगर वहां के हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है।

--Advertisement--