UPPSC Result 2024 : किसान के लाल का कमाल पहले ही प्रयास में पाई GST असिस्टेंट कमिश्नर पद पर पूरे यूपी में पहली रैंक
News India Live, Digital Desk: कहते हैं कि 'लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती।' इसी बात को सच साबित कर दिखाया है उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के एक छोटे से गांव के रहने वाले अखिल पांडेय ने। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) 2024 के परिणाम जारी होने के बाद उनके गांव धर्मपुर समेत पूरे जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। एक बेहद साधारण किसान परिवार से आने वाले अखिल ने अपने पहले ही प्रयास में ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी गूंज आज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। उनकी सफलता उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
GST असिस्टेंट कमिश्नर लिस्ट में प्रदेश में पहला स्थान यूपी पीसीएस 2024 (UP PCS Final Result 2024) के फाइनल परिणाम में अखिल पांडेय का चयन 'असिस्टेंट कमिश्नर (कमर्शियल टैक्स/GST)' के बेहद प्रतिष्ठित पद के लिए हुआ है। सबसे बड़ी बात यह है कि अखिल ने असिस्टेंट कमिश्नर GST की लिस्ट में पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान (रैंक 1) हासिल किया है। वहीं, अगर ओवरऑल मुख्य मेरिट लिस्ट की बात करें तो उन्होंने 55वीं रैंक प्राप्त की है। अपनी इस जबरदस्त सफलता से अखिल ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे आजमगढ़ जिले का नाम रोशन कर दिया है।
गांव की पगडंडियों से तय किया सिविल सेवा का सफर अखिल पांडेय का यह सफर किसी प्रेरणादायक फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनके पिता शैलेंद्र पांडेय एक आम किसान हैं और खेती-किसानी करके ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अखिल की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा और परवरिश गांव की मिट्टी और पगडंडियों के बीच ही हुई है। उन्होंने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई गांव के ही एक साधारण स्कूल से पूरी की। उनके पास कभी भी आधुनिक संसाधनों की भरमार नहीं रही, लेकिन अपनी लगन और मेधावी स्वभाव के चलते उन्होंने कभी अपनी पढ़ाई पर इसका असर नहीं पड़ने दिया।
BHU से मिली उड़ान, बिना महंगी कोचिंग के पाई सफलता गांव से स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद अखिल ने उच्च शिक्षा के लिए वाराणसी का रुख किया और देश के प्रतिष्ठित 'बनारस हिंदू विश्वविद्यालय' (BHU) में दाखिला लिया। उन्होंने बीएचयू से कॉमर्स की पढ़ाई की। यहीं के शानदार शैक्षणिक माहौल ने उनके सपनों को नई उड़ान दी और उन्होंने सिविल सेवा में जाने का दृढ़ निश्चय कर लिया। आज के समय में जहां परीक्षार्थी महंगी-महंगी कोचिंग और दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख करते हैं, वहीं अखिल ने अपने घर पर रहकर 'सेल्फ स्टडी' (स्व-अध्ययन) का रास्ता चुना। उन्होंने सिर्फ मॉक टेस्ट और इंटरव्यू की बारीकियों को समझने के लिए कुछ मदद ली। उनके दोस्तों के मुताबिक, अखिल शुरू से ही अपनी पढ़ाई को लेकर बेहद गंभीर और अनुशासित रहे हैं।
गांव में जश्न का माहौल, युवाओं के लिए बने प्रेरणा स्रोत अखिल की इस ऐतिहासिक सफलता की खबर जैसे ही जहानागंज ब्लॉक के धर्मपुर गांव पहुंची, वहां जश्न का माहौल बन गया। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। गांव वालों का सीना गर्व से चौड़ा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि अखिल की यह कामयाबी साबित करती है कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा उसे मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। अखिल की यह उपलब्धि ग्रामीण परिवेश के उन तमाम युवाओं के लिए एक मशाल की तरह है, जो संसाधनों की कमी का रोना रोकर पीछे हट जाते हैं। मेहनत और लगन के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है।