UP Project Approval : अब मंत्रियों के पास होगी 50 करोड़ की ताकत, सीएम योगी ने बदली वर्षों पुरानी व्यवस्था

Post

News India Live, Digital Desk : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति प्रक्रिया को तेज, सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राज्य सरकार ने विभागीय मंत्रियों के वित्तीय अधिकारों में 5 गुना की भारी बढ़ोतरी की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य परियोजनाओं को समय पर मंजूरी दिलाना और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को जमीनी स्तर पर उतारना है।

1. मंजूरी के लिए नई त्रिस्तरीय व्यवस्था (The 3-Tier Approval System)

अब प्रोजेक्ट की लागत के आधार पर तय होगा कि उसकी फाइल किसके पास जाएगी:

प्रोजेक्ट की लागतमंजूरी देने वाला स्तर (Authority)पहले की सीमा
₹50 करोड़ तकसंबंधित विभागीय मंत्री (Departmental Minister)₹10 करोड़
₹50 करोड़ से ₹150 करोड़राज्य के वित्त मंत्री (Finance Minister)-
₹150 करोड़ से अधिकमुख्यमंत्री (CM)-

2. 15 अप्रैल तक की 'डेडलाइन' और सख्त नियम

मुख्यमंत्री ने केवल अधिकार ही नहीं बढ़ाए, बल्कि जवाबदेही भी तय की है:

वार्षिक कार्ययोजना: सभी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी वार्षिक कार्ययोजना 15 अप्रैल 2026 तक हर हाल में स्वीकृत करा लें।

लागत में बढ़ोतरी: यदि किसी प्रोजेक्ट की लागत 15% से अधिक बढ़ती है, तो उसे दोबारा अनुमोदन (Re-approval) के लिए भेजना होगा और इसका ठोस कारण बताना होगा।

गुणवत्ता ऑडिट: बड़ी परियोजनाओं (सड़क, सेतु, सीवर लाइन) का थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट अब IIT, NIT या सरकारी तकनीकी संस्थानों से कराना अनिवार्य होगा।

3. आशा और आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए बड़ी राहत

बैठक के दौरान सीएम योगी ने संवेदनशील रुख अपनाते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए:

समय पर मानदेय: अल्प-वेतनभोगी कर्मियों (आशा बहनें और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता) का मानदेय हर महीने की तय तारीख पर उनके बैंक खातों में पहुंच जाना चाहिए।

केंद्रांश की प्रतीक्षा नहीं: यदि केंद्र सरकार से फंड मिलने में देरी होती है, तो राज्य सरकार अपने संसाधनों से यह पैसा जारी करेगी ताकि कर्मियों को इंतजार न करना पड़े।

4. डिजिटल सुधार: 'पेपरलेस' होगी ट्रेजरी

उत्तर प्रदेश सरकार अब साइबर ट्रेजरी की ओर बढ़ रही है। अप्रैल 2026 तक राज्य की पूरी कोषागार व्यवस्था पेपरलेस हो जाएगी। बिलों का भुगतान और पेंशन से जुड़े कार्य पूरी तरह ऑनलाइन होंगे, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

वित्तीय अनुशासन में यूपी अव्वल

बैठक में यह तथ्य भी सामने आया कि वर्ष 2023-24 में उत्तर प्रदेश ने ₹1,10,555 करोड़ का पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) किया, जो पूरे देश में सबसे अधिक है। राज्य की देनदारी भी अब GSDP के 27% पर आ गई है, जो बेहतर वित्तीय प्रबंधन का संकेत है।

--Advertisement--