UP News : मुरादाबाद में समाजवादी पार्टी पर बड़ी कार्रवाई, सरकारी जमीन पर बना ऑफिस खाली करने का नोटिस जारी

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News India Live, Digital Desk: लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब मुरादाबाद से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां जिला प्रशासन ने समाजवादी पार्टी के कार्यालय को लेकर एक सख्त कदम उठाया है। प्रशासन ने सपा जिलाध्यक्ष को एक नोटिस जारी कर दो हफ्ते के भीतर पार्टी कार्यालय को खाली करने का आदेश दिया है।

यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि यह ऑफिस पार्टी की गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र था।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद मुरादाबाद के सिविल लाइंस इलाके में स्थित समाजवादी पार्टी के कार्यालय की जमीन को लेकर है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्यालय जिस जमीन पर बना है, वह असल में सिंचाई विभाग (Irrigation Department) की सरकारी जमीन है।

जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि सपा ने इस सरकारी जमीन पर अवैध रूप से अपना कार्यालय बना रखा है। कई सालों से यह मामला चल रहा था, लेकिन अब प्रशासन ने इस पर अंतिम फैसला लेते हुए कार्यालय को हटाने का आदेश दे दिया है।

दो हफ्तों का अल्टीमेटम

सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव को भेजे गए नोटिस में उन्हें 15 दिनों का समय दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट लिखा है कि यदि समाजवादी पार्टी खुद इस सरकारी भूमि को दो सप्ताह के भीतर खाली नहीं करती है, तो जिला प्रशासन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर इस पर बने अवैध निर्माण को ध्वस्त कर देगा और जमीन पर कब्जा वापस ले लेगा।

इसकी पुष्टि करते हुए मुरादाबाद के सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है, क्योंकि यह जमीन सिंचाई विभाग की है और इस पर किसी भी तरह का निजी या राजनीतिक निर्माण अवैध है।

समाजवादी पार्टी की क्या है प्रतिक्रिया?

फिलहाल इस नोटिस पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी इस मामले को कानूनी रूप से चुनौती दे सकती है। यह देखना अहम होगा कि सपा नेतृत्व इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या वे इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से किया गया काम बताते हैं या नहीं।

इस घटनाक्रम ने मुरादाबाद की सियासत में गरमाहट ला दी है। चुनाव खत्म होने के बाद इस तरह की कार्रवाई के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।