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March 14 2026 12:03 am

UP Madrasa : 12वीं की छात्रा से मदरसे ने मांगा पवित्रता का सबूत, पूरा मामला जानकर खौल उठेगा खून

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से शिक्षा के मंदिर को शर्मसार करने वाली एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनकर किसी भी सभ्य समाज का सिर शर्म से झुक जाएगा। यहां एक मदरसे पर आरोप है कि उसने अपनी ही एक छात्रा से दोबारा एडमिशन के लिए 'वर्जिनिटी सर्टिफिकेट' यानी कौमार्य प्रमाण पत्र की मांग कर डाली। जब परिवार यह बेतुका और अपमानजनक सर्टिफिकेट नहीं दे पाया, तो छात्रा का नाम काटकर उसके हाथ में ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) थमा दिया गया।

क्या लड़कों से बात करना इतना बड़ा गुनाह है?

यह हैरान कर देने वाला मामला मुरादाबाद के मूढ़ापांडे थाना क्षेत्र के बिशनपुर गांव का है। यहां स्थित मदरसा जामिया खदीजतुल कुबरा लिल बनात में पढ़ने वाली एक छात्रा ने 'मुंशी' (10वीं के समकक्ष) की परीक्षा अच्छे नंबरों से पास की थी। अब उसे आगे 'आलिमा' (12वीं के समकक्ष) में एडमिशन लेना था। लेकिन मदरसे की मैनेजमेंट को छात्रा का गांव के कुछ लड़कों से बात करना इतना नागवार गुजरा कि उन्होंने उसके चरित्र पर ही सवाल खड़े कर दिए।

आरोप है कि जब छात्रा एडमिशन के लिए मदरसे पहुंची, तो मैनेजमेंट ने उसके सामने एक ऐसी शर्त रख दी जिसे सुनकर उसके और उसके परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। उनसे कहा गया कि अगर लड़की को दोबारा मदरसे में पढ़ना है, तो उसका 'वर्जिनिटी टेस्ट' कराकर सर्टिफिकेट जमा करना होगा।

"सबूत लाओ, वरना स्कूल से बाहर जाओ"

छात्रा के पिता, जो पेशे से एक मजदूर हैं, इस बेतुकी मांग को सुनकर सन्न रह गए। उन्होंने जब यह अपमानजनक सर्टिफिकेट लाने में असमर्थता जताई, तो मदरसे ने बेरहमी से उनकी बेटी का नाम रजिस्टर से काट दिया और उसे स्कूल से निकालने का फरमान सुना दिया। एक होनहार छात्रा, जो आगे पढ़ना चाहती थी, उसका भविष्य मदरसे की इस तालिबानी सोच की भेंट चढ़ गया।

प्रशासन ने लिया संज्ञान, जांच के आदेश

बेटी का भविष्य बर्बाद होता देख, गरीब पिता ने हिम्मत नहीं हारी और इंसाफ के लिए अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक दी। मामला जब जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी (DMWO) के पास पहुंचा, तो वह भी इस घटना को सुनकर हैरान रह गए।

उन्होंने साफ तौर पर कहा, "यह एक बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मामला है। किसी भी छात्रा से इस तरह के सर्टिफिकेट की मांग करने का कोई नियम या कानून नहीं है।" उन्होंने तुरंत इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाने का आदेश दिया है और आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या शिक्षा के मंदिरों में हमारी बेटियों को अपनी पवित्रता का सबूत देकर दाखिला लेना पड़ेगा? अब देखना यह होगा कि जांच के बाद इस शर्मनाक फरमान को सुनाने वाले मदरसे और उसके मैनेजमेंट पर क्या कार्रवाई होती है।