विजय हजारे ट्रॉफी के टॉप स्कोरर की अनोखी कहानी, जब कोहली-धोनी से मिलने के लिए बनना पड़ा नेट बॉलर

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News India Live, Digital Desk: जब भी कोई उभरता हुआ युवा क्रिकेटर विराट कोहली, एमएस धोनी या रोहित शर्मा से अपनी पहली मुलाकात का जिक्र करता है, तो वह अक्सर उनकी सलाह या उनके विनम्र स्वभाव की बातें करता है। लेकिन इस साल की विजय हजारे ट्रॉफी में रनों का अंबार लगाने वाले अमन मोखड़े (Aman Mokhade) की कहानी थोड़ी अलग और बेहद दिलचस्प है।

यह कहानी केवल सितारों की चमक की नहीं, बल्कि एक युवा खिलाड़ी के उस 'जुनून' और 'जुगाड़' की है, जिसने उन्हें आज घरेलू क्रिकेट का चमकता सितारा बना दिया है।

2017 का वो 'बॉल-बॉय' और उसकी चतुराई

बात साल 2017 की है, जब भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पांचवां वनडे नागपुर के विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में खेला जाना था। अमन मोखड़े उस समय एक नियमित वॉलंटियर थे और अक्सर 'बॉल-बॉय' की ड्यूटी करते थे।

अमन बताते हैं कि वे बॉल-बॉय बनकर थक चुके थे, खासकर टेस्ट मैचों में जहां गेंद बमुश्किल बाउंड्री तक पहुंचती थी। वे सितारों के करीब जाना चाहते थे, लेकिन कोच ने कहा कि नेट्स में केवल गेंदबाजों की जरूरत है।

नेट्स में एंट्री का 'मास्टर प्लान':

अमन मोखड़े ने News18 CricketNext से बातचीत में खुलासा किया:

"मैने कोच से झूठ बोला और कहा— 'सर, प्लीज मुझे बतौर गेंदबाज रख लीजिए।' मैं बस उन्हें करीब से देखना चाहता था, उनकी रूटीन समझना चाहता था। मुझे पता था कि अगर मैं नेट बॉलर बन गया, तो मुझे दो-तीन दिन उनके साथ बिताने का मौका मिलेगा। मैंने वही किया।"

'ऑलराउंडर' नहीं, 'एन्थू कटलेट' हैं अमन

घरेलू क्रिकेट को फॉलो करने वाले लोग अमन को उनकी शानदार तकनीक और शॉट्स की रेंज के लिए जानते हैं। लेकिन उनकी खासियत केवल बल्लेबाजी नहीं है। अमन खुद को एक 'एन्थू कटलेट' (Enthu Cutlet) कहते हैं— यानी वो खिलाड़ी जो मैदान पर कुछ भी करने को तैयार रहे।

मल्टी-टैलेंटेड: अमन मोखड़े केवल एक बल्लेबाज नहीं हैं, बल्कि वे एक ऑफ-स्पिनर, लेग-स्पिनर और विकेटकीपर भी हैं।

विजय हजारे ट्रॉफी का जलवा: इस सीजन में उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से विपक्षी गेंदबाजों के पसीने छुड़ा दिए और टूर्नामेंट के 'टॉप रन-स्कोरर' बनकर उभरे।

सितारों से क्या सीखा?

2017 में जब वे बतौर नेट बॉलर कोहली और धोनी के सामने गेंदबाजी कर रहे थे, तब उन्होंने केवल क्रिकेट नहीं सीखा, बल्कि बड़े मैचों से पहले की मानसिक तैयारी (Mental Routine) को करीब से देखा। आज विदर्भ क्रिकेट के लिए खेलते हुए वही अनुभव उनके काम आ रहा है।

अमन की यह यात्रा दर्शाती है कि अगर आपके पास प्रतिभा के साथ-साथ सही 'जज्बा' और सीखने की भूख हो, तो आप बॉल-बॉय से लेकर टॉप रन-स्कोरर तक का सफर तय कर सकते हैं।