यूक्रेन युद्ध: अमेरिका का रूस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला! दो तेल कंपनियों पर लगाया बैन, दुनिया में हड़कंप
यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका ने अब रूस पर अपना सबसे बड़ा दांव चल दिया है। उसने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों, रोसनेफ्ट और लुकोइल, पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। अमेरिका का साफ कहना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शांति वार्ता को लेकर ईमानदार नहीं हैं और अब सब्र का बांध टूट चुका है।
यह बड़ा कदम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच होने वाली शिखर सम्मेलन के रद्द होने के ठीक अगले दिन उठाया गया है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगी आग
जैसे ही अमेरिका ने इन दो बड़ी तेल कंपनियों पर शिकंजा कसा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई। गुरुवार को तेल के दाम 1 डॉलर प्रति बैरल से भी ज्यादा बढ़ गए। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल और भी महंगा हो सकता है।
अमेरिका बोला- पुतिन बातचीत के लिए गंभीर नहीं
पहले तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप रूस पर सीधे प्रतिबंध लगाने से बच रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि वह पुतिन से बात करके उन्हें शांति के लिए मना लेंगे। लेकिन अब अमेरिकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि पुतिन इस फिजूल की जंग को खत्म करने के मूड में नहीं हैं और ये तेल कंपनियां ही रूस की "वॉर मशीन" को पैसा दे रही हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में चेतावनी दी कि यह तो बस शुरुआत है। अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका, यूक्रेन में युद्ध खत्म कराने के लिए और भी कड़े कदम उठाने को पूरी तरह तैयार है। उन्होंने साफ कहा, "पुतिन बातचीत की मेज पर ईमानदारी और साफ नीयत से नहीं आए।"
ब्रिटेन और यूरोप भी हुए सख्त
अमेरिका अकेला नहीं है। पिछले हफ्ते ही ब्रिटेन ने भी रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगा दिए थे। इसके अलावा, यूरोपीय संघ के देशों ने भी रूस के खिलाफ 19वां प्रतिबंध पैकेज मंजूर कर लिया है। इसमें 2027 तक रूस से आने वाली नेचुरल गैस पर रोक, रूस के तेल टैंकरों को ब्लैकलिस्ट करना और रूसी डिप्लोमैट्स के आने-जाने पर सख्ती जैसे कई कड़े कदम शामिल हैं।
कुल मिलाकर, यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देश अब रूस पर चौतरफा दबाव बनाने की तैयारी में हैं, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है।