झारखंड में सियासत का यू-टर्न जिसे कहते थे भ्रष्टाचारी, अब उसी को मिला पद्म सम्मान ,आखिर क्या है पीएम मोदी का प्लान?
News India Live, Digital Desk: राजनीति कब किस करवट बैठ जाए, यह बड़े-बड़े पंडित भी नहीं बता पाते। झारखंड की सियासत में अभी बिल्कुल ऐसा ही कुछ हुआ है जिसने सबको हैरान कर दिया है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और राज्य के सबसे कद्दावर आदिवासी नेता शिबू सोरेन (Shibu Soren), जिन्हें लोग प्यार से 'गुरुजी' या 'दिशोम गुरु' कहते हैं, को देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'पद्म भूषण' से नवाज़ने का ऐलान किया है।
सुनने में यह एक साधारण खबर लग सकती है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं। आखिर बीजेपी, जो जेएमएम और सोरेन परिवार की सबसे बड़ी विरोधी मानी जाती है, उसने अचानक इतना बड़ा दिल कैसे दिखा दिया?
आइये इस सियासी 'गुगली' को आसान भाषा में समझते हैं।
1. सम्मान या आदिवासी वोट बैंक पर नज़र?
हम सब जानते हैं कि झारखंड में आदिवासियों के लिए शिबू सोरेन भगवान की तरह पूजे जाते हैं। उन्होंने झारखंड को अलग राज्य बनाने में जो संघर्ष किया, उसे कोई नहीं भूल सकता। बीजेपी अच्छी तरह जानती है कि अगर लोकसभा चुनाव में जीतना है, तो आदिवासी वोट बहुत ज़रूरी है। गुरुजी को सम्मान देकर मोदी सरकार ने सीधे आदिवासी समाज के दिल को छूने की कोशिश की है। यह एक ऐसा कदम है जिससे जेएमएम समर्थक भी बीजेपी की तारीफ़ करने को मजबूर हो जाएंगे।
2. 'INDIA' गठबंधन में सेंधमारी?
अभी विपक्षी पार्टियों का गठबंधन (INDIA Alliance) बीजेपी के खिलाफ खड़ा है, जिसमें जेएमएम भी एक अहम हिस्सा है। लेकिन मोदी जी ने विरोधी खेमे के सबसे बड़े 'आइकन' को सम्मानित करके विपक्ष को दुविधा में डाल दिया है। अब जेएमएम खुलकर बीजेपी की आलोचना भी नहीं कर पाएगी और न ही इस सम्मान को ठुकरा पाएगी। यह बीजेपी की पुरानी रणनीति है— जैसे उन्होंने प्रणब मुखर्जी (कांग्रेस) या मुलायम सिंह यादव को सम्मानित किया था।
3. क्या JMM और BJP करीब आ रहे हैं?
बाजार में एक नई चर्चा भी शुरू हो गई है। क्या भविष्य में बीजेपी और जेएमएम का गठबंधन हो सकता है? इतिहास गवाह है कि बीजेपी और जेएमएम पहले भी साथ मिलकर सरकार चला चुके हैं। राजनीति में कुछ भी नामुमकिन नहीं है। यह सम्मान उस "बंद दरवाजे" को खटखटाने जैसा हो सकता है।
4. 'विरोधाभास' भी कम नहीं!
एक वो दौर था जब शिबू सोरेन पर कई गंभीर आरोप लगे थे और बीजेपी उन पर हमलावर रहती थी। लेकिन आज उन्हें इतना बड़ा सम्मान देना बताता है कि राजनीति में वक़्त और जरूरत के हिसाब से चीजें कैसे बदल जाती हैं। बीजेपी ने यह सन्देश दिया है कि वह पार्टी विचारधारा से ऊपर उठकर 'जनता के नायकों' का सम्मान करती है।