ट्रंप का एक दस्तखत और जापान में आया भूचाल! छेड़ दिया नया 'ट्रेड वॉर'

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पूरी दुनिया की नजरें एक बार फिर अमेरिका पर टिक गई हैं, जहाँ पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने उनके सबसे करीबी दोस्तों में से एक, जापान को भी बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए जापान से आने वाले सामान पर 15% का भारी-भरकम टैरिफ (नया टैक्स) लगाने का ऐलान कर दिया है।

इस एक फैसले ने अमेरिका और जापान की दोस्ती में एक बड़ी दरार डाल दी है और एक नए 'ट्रेड वॉर' यानी व्यापार युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है।

आसान भाषा में समझिए, इसका मतलब क्या है?

इस फैसले का मतलब बहुत सीधा है। अब जापान में बनने वाला कोई भी सामान जब अमेरिका में बिकने के लिए आएगा, तो उस पर 15% का अतिरिक्त टैक्स लगेगा। इससे अमेरिका में जापानी सामानों की कीमतें बढ़ जाएंगी।

आपकी जेब पर क्या होगा असर?

यह फैसला भले ही अमेरिका और जापान के बीच का हो, लेकिन इसका असर दुनिया भर में महसूस किया जा सकता है।

  • महंगी होंगी जापानी चीजें: अमेरिका में रहने वाले लोगों के लिए अब जापान की मशहूर चीजें जैसे टोयोटा (Toyota) और होंडा (Honda) की गाड़ियां, सोनी (Sony) के टीवी और कैमरे, पैनासोनिक (Panasonic)  के इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदना पहले से ज़्यादा महंगा हो जाएगा।
  • जापान को भारी नुकसान: जापान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक उसके एक्सपोर्ट यानी दूसरे देशों में सामान बेचने पर निर्भर करती है। अमेरिका उसका सबसे बड़ा खरीदार है। इस नए टैक्स से जापानी कंपनियों को भारी नुकसान होगा।
  • बदले की कार्रवाई का डर: अब इस बात का डर है कि जापान भी चुप नहीं बैठेगा और वह भी अमेरिका से आने वाले सामानों, जैसे कि मक्का या गेहूं, पर अपना टैक्स लगा सकता है।

लेकिन ट्रंप ने यह कदम उठाया क्यों?

डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से "अमेरिका फर्स्ट" (America First) की नीति पर चलते आए हैं। उनका मानना है कि जापान जैसे देश अमेरिका के साथ व्यापार में "अनुचित लाभ" उठाते हैं, यानी वे अमेरिका में अपना सामान तो बहुत बेचते हैं, लेकिन अमेरिका से उतना सामान खरीदते नहीं हैं।

इस टैरिफ के जरिए ट्रंप जापान पर दबाव बनाना चाहते हैं ताकि वह अमेरिका के साथ एक नई और ज़्यादा "संतुलित" ट्रेड डील करे।

यह कदम हमें ट्रंप के उस पुराने दौर की याद दिलाता है जब उन्होंने चीन के खिलाफ भी ऐसा ही एक बड़ा ट्रेड वॉर छेड़ा था। अब देखना यह है कि जापान इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह तनाव एक बड़े आर्थिक संकट का रूप लेगा।