Trump's biggest bet : क्या अपने करीबी सर्जियो गोर को भारत भेजकर पीएम मोदी को देना चाहते हैं खास संदेश
News India Live, Digital Desk: Trump's biggest bet : डोनाल्ड ट्रंप, जो अमेरिका में दोबारा राष्ट्रपति बनने की उम्मीद कर रहे हैं, भारत के लिए अपने वफादार सर्जियो गोर को अमेरिका का अगला राजदूत बनाने की तैयारी में हैं. इस संभावित नियुक्ति ने दिल्ली से वाशिंगटन तक कयासों का बाजार गर्म कर दिया है कि आखिर ट्रंप इसके जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्या संदेश देना चाहते हैं. क्या यह सिर्फ़ वफादारी का इनाम है, या इसके पीछे कुछ गहरे राजनयिक समीकरण हैं?
सर्जियो गोर, जो पहले एक युवा रिपब्लिकन रणनीतिकार रहे हैं, ट्रंप के साथ काफी करीब से काम करते आए हैं. वे 'ट्रंप मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' (Trump MAGA) आंदोलन के शुरुआती समर्थकों में से हैं और उन्होंने ट्रंप की नीतियों और अभियानों में अहम भूमिका निभाई है. अगर उन्हें भारत का राजदूत नियुक्त किया जाता है, तो यह दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन अपने प्रमुख सहयोगी देशों में ऐसे प्रतिनिधियों को भेजना पसंद करेगा जो उनके विचारों और एजेंडे को अच्छी तरह समझते हों और उसे आगे बढ़ा सकें.
ट्रंप के लिए सर्जियो गोर सिर्फ एक स्टाफ सदस्य नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक सफर के एक भरोसेमंद साथी हैं. वे पहले उनके प्रवक्ता, फिर चुनाव प्रचार टीम के अहम सदस्य और अब उनके बाहरी संबंधों के सलाहकार के तौर पर काम करते हैं. उनकी खासियत यह है कि वे ट्रंप के विचारों को बेहद सटीक तरीके से पेश करते हैं और किसी भी मुश्किल स्थिति में उनका पक्ष मजबूती से रखते हैं. ऐसे में, भारत जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश में गोर की नियुक्ति एक साफ संकेत हो सकता है कि ट्रंप भारत के साथ अपने संबंधों को और मज़बूत और अपनी शर्तों पर आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिसमें पीएम मोदी के साथ सीधे और भरोसेमंद संवाद को प्राथमिकता दी जाए.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप एक ऐसे वफादार व्यक्ति को भारत भेजना चाहते हैं जो उनके एजेंडे को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ा सके और दोनों देशों के संबंधों में किसी तरह की असहजता न पैदा होने दे. यह नियुक्ति एक तरह से पीएम मोदी को भी यह संदेश हो सकता है कि भले ही नेतृत्व बदले, लेकिन ट्रंप प्रशासन भारत के साथ मजबूत रिश्ते को प्राथमिकता देगा और आपसी समझ को बढ़ाएगा, खासकर ऐसे व्यक्ति के ज़रिए जो उनके करीबी मंडल का सदस्य हो. कुल मिलाकर, यह नियुक्ति दोनों देशों के भविष्य के संबंधों और साझा रणनीतियों के लिए एक नई दिशा तय कर सकती है.