ट्रंप ने चीन पर बरसाई परमाणु बम 100% टैरिफ से शुरू हुआ नया ट्रेड वॉर, भारत पर आएगा बड़ा खतरा

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News India Live, Digital Desk: अमेरिका और चीन के बीच जारी कारोबारी तनातनी में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है! अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर 100% का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का ऐलान करके एक नए और बड़े 'ट्रेड वॉर' की शुरुआत कर दी है. इस फैसले ने दुनिया भर के बाजारों में हलचल मचा दी है. जब दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ सीधे टकराती हैं, तो इसका असर वैश्विक व्यापार पर तो पड़ता ही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि भारत जैसे विकासशील और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

क्या है डोनाल्ड ट्रंप का नया ट्रेड वॉर?

ट्रंप का 100% टैरिफ का मतलब है कि चीन से अमेरिका आने वाले कई उत्पादों की कीमत सीधे दोगुनी हो जाएगी. यह उन अतिरिक्त शुल्कों के अलावा है जो पहले से लगे हुए हैं. इस कदम का मकसद चीन पर अपनी व्यापार नीतियों में बदलाव करने का दबाव बनाना और अमेरिकी उद्योगों को बचाना है. इससे पहले भी ट्रंप ने चीन पर कड़े टैरिफ लगाए थे, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध काफी तनावपूर्ण हो गए थे.

भारत पर क्या होगा इस ट्रेड वॉर का असर?

यह नया ट्रेड वॉर भारत के लिए कुछ मायनों में चुनौतियां ला सकता है, तो कुछ नए अवसर भी पैदा कर सकता है:

चुनौतियां:

  1. वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा: अमेरिका और चीन के बीच अगर ट्रेड वॉर बढ़ता है, तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था धीमी पड़ सकती है. दुनिया भर में मंदी आने से भारत का निर्यात प्रभावित हो सकता है और विदेशी निवेश (FDI) भी घट सकता है.
  2. सप्लाई चेन पर असर: चीन वैश्विक सप्लाई चेन का एक बड़ा हिस्सा है. टैरिफ बढ़ने से चीन से आयात होने वाले सामान महंगे हो जाएंगे, जिससे भारतीय उद्योगों की लागत बढ़ सकती है, जो चीनी घटकों पर निर्भर हैं.
  3. निर्यात प्रतिस्पर्धा: चीन से उत्पादों के महंगे होने पर हो सकता है कि भारतीय उत्पाद चीन की तुलना में थोड़े प्रतिस्पर्धी हो जाएं, लेकिन वैश्विक मांग में कमी आने से समग्र निर्यात पर बुरा असर पड़ सकता है.
  4. शेयर बाजार में अस्थिरता: ऐसे ट्रेड वॉर की खबरों से वैश्विक शेयर बाजारों में अक्सर गिरावट आती है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है.

अवसर:

  1. उत्पादन और निर्यात का अवसर (मेक इन इंडिया): अगर चीनी उत्पाद महंगे होते हैं, तो दुनिया भर की कंपनियाँ चीन के विकल्प तलाशेंगी. ऐसे में भारत 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में एक मजबूत विकल्प बनकर उभर सकता है, जिससे भारतीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और निर्यात भी बढ़ सकता है.
  2. भारत में निवेश बढ़ेगा: कई बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, जो चीन में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स चला रही हैं, वे वहां से हटकर भारत जैसे अन्य देशों में निवेश कर सकती हैं ताकि टैरिफ से बचा जा सके. यह भारत के लिए विदेशी निवेश आकर्षित करने का बड़ा अवसर है.
  3. चीन से आयात पर निर्भरता कम: भारत चीन से कई उत्पादों का भारी मात्रा में आयात करता है. अगर चीन से ये सामान महंगे होते हैं, तो भारत को आत्मनिर्भर बनने का प्रोत्साहन मिलेगा और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है.
  4. रणनीतिक लाभ: वैश्विक राजनीति में भारत अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है, क्योंकि कई देश चीन के बढ़ते प्रभुत्व से चिंतित हैं.

निष्कर्ष रूप में, अमेरिका-चीन का यह ट्रेड वॉर भारत के लिए एक तलवार की दो धारी जैसा है. भारत को इस स्थिति का बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से फायदा उठाना होगा और अपनी आर्थिक नीतियों को इस तरह से समायोजित करना होगा जिससे नुकसान कम हो और अवसर अधिक मिलें.