ईरान का प्रस्ताव ट्रंप को नहीं आया पसंद! परमाणु कार्यक्रम पर चुप्पी बनी बड़ी अड़चन, रूबियो ने भी दी कड़ी चेतावनी
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को खत्म करने की कोशिशें एक बार फिर अधर में लटकती नजर आ रही हैं। ईरान ने संघर्ष समाप्ति का एक नया प्रस्ताव भेजा है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप इससे खुश नहीं हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है।
व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई अहम बैठक
सोमवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक के दौरान ईरान के इस प्रस्ताव की समीक्षा की गई। बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ट्रंप को यह प्रस्ताव पसंद नहीं आया। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
ईरान ने क्या रखा था प्रस्ताव?
ईरान ने सुझाव दिया था कि अगर अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटा ले और दुश्मनी खत्म करने पर सहमत हो जाए तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाई गई पाबंदियां हटा लेगा। हालांकि ईरान ने साफ कह दिया कि वह अपनी परमाणु गतिविधियों पर किसी भी चर्चा से बचना चाहता है। यह प्रस्ताव कथित तौर पर पाकिस्तान के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था।
रूबियो बोले— परमाणु हथियारों पर समझौता नहीं
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में साफ कहा कि किसी भी समझौते में यह शर्त अनिवार्य रूप से शामिल होनी चाहिए कि ईरान परमाणु हथियार न बना पाए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसी किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेगा जिसमें ईरान दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक पर नियंत्रण बनाए रखे। रूबियो ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और इसे किसी एक देश की शर्तों पर नहीं खोला जा सकता।
प्रस्ताव स्वीकार होने की संभावना नहीं
विश्लेषकों के मुताबिक जब तक ईरान परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी ठोस समझौते की संभावना बेहद कम है। ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता साफ है कि ईरान को परमाणु हथियार संपन्न देश नहीं बनने दिया जाएगा और इस मुद्दे पर किसी भी तरह की छूट देने का सवाल ही नहीं उठता।