Trump-Bangladesh Mega Deal: ट्रंप और यूनुस के बीच होने वाली है बड़ी डील क्या बांग्लादेश बनेगा अमेरिका का नया दोस्त?

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News India Live, Digital Desk: दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक बहुत बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के बीच एक ऐसी व्यापारिक डील (Trade Deal) की तैयारी चल रही है, जो ढाका की किस्मत बदल सकती है। इस सौदे के केंद्र में 'जीरो टैरिफ' (Zero Tariff) और अरबों डॉलर के बोइंग विमान हैं, जिसने भारत समेत पड़ोसी देशों की चिंताएं और उत्सुकता दोनों बढ़ा दी हैं।

क्या है ट्रंप का 'जीरो टैरिफ' प्लान?

डोनाल्ड ट्रंप अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के तहत बांग्लादेश को एक बड़ा ऑफर दे सकते हैं। इस डील के तहत बांग्लादेशी उत्पादों, खासकर गारमेंट्स (कपड़ों) पर अमेरिका आयात शुल्क (Import Duty) को खत्म या न्यूनतम कर सकता है। बदले में, बांग्लादेश को अमेरिका से अरबों डॉलर के बोइंग (Boeing) जेट्स खरीदने होंगे और अमेरिकी निवेश के लिए अपने दरवाजे पूरी तरह खोलने होंगे।

IMF लोन और आर्थिक संकट से उबरने की छटपटाहट

बांग्लादेश फिलहाल गहरे आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहा है। उसे IMF से भारी-भरकम कर्ज की दरकार है। जानकारों का मानना है कि अमेरिका के साथ यह व्यापारिक समझौता बांग्लादेश को IMF से आसानी से लोन दिलाने में 'गारंटर' की भूमिका निभा सकता है। पूर्व राजनयिक वीना सीकरी के अनुसार, यह डील बांग्लादेश के लिए एक 'लाइफलाइन' साबित हो सकती है, लेकिन इसके पीछे अमेरिका की अपनी रणनीतिक शर्तें भी होंगी।

[Image: Donald Trump and Muhammad Yunus symbolic meeting for trade]

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारत इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। अगर बांग्लादेश को अमेरिका से विशेष व्यापारिक छूट मिलती है, तो:

गारमेंट सेक्टर में प्रतिस्पर्धा: भारतीय कपड़ा उद्योग के लिए वैश्विक बाजार में बांग्लादेश से मुकाबला करना और कठिन हो जाएगा।

रणनीतिक प्रभाव: बंगाल की खाड़ी में अमेरिका की बढ़ती मौजूदगी भारत के सुरक्षा हितों के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

चीन को झटका: यह डील बांग्लादेश को चीन के आर्थिक प्रभाव से दूर कर अमेरिका के पाले में ला सकती है।

बोइंग जेट्स और व्यापार संतुलन

अमेरिका चाहता है कि बांग्लादेश अपनी विमानन सेवाओं (Aviation) के विस्तार के लिए यूरोपीय एयरबस के बजाय अमेरिकी बोइंग विमानों को चुने। यह ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें वे व्यापार घाटे को कम करने के लिए सहयोगी देशों पर अमेरिकी उत्पाद खरीदने का दबाव बनाते हैं।