इस कपल ने खोला राज, होटल से लेकर खाने तक का पूरा खर्च और बजट मैनेज करने के सीक्रेट्स
विदेशी यात्राओं का सपना देखने वाले हर भारतीय टूरिस्ट के जेहन में सबसे पहला नाम अगर किसी खूबसूरत देश का आता है, तो वह बर्फीली वादियों और आल्प्स पहाड़ों से घिरे स्विट्जरलैंड का होता है, जिसे दुनिया का स्वर्ग कहा जाता है। लेकिन इस देश का नाम सुनते ही सबसे बड़ा डर जो लोगों के मन में बैठ जाता है, वह है वहां का भारी-भरकम खर्च, क्योंकि आम तौर पर यह माना जाता है कि स्विट्जरलैंड घूमना केवल करोड़पतियों और रईसों के बस की बात है। इस आम धारणा को पूरी तरह से गलत साबित करते हुए हाल ही में एक ट्रैवल कपल ने अपनी 21 दिनों की लंबी स्विट्जरलैंड यात्रा का पूरा कच्चा-चिट्ठा दुनिया के सामने खोलकर रख दिया है और यह साबित कर दिया है कि सही प्लानिंग और स्मार्ट डील्स के जरिए इस महंगे देश को भी बजट में घूमा जा सकता है। इस साहसी कपल ने मात्र 7.5 लाख रुपये के कुल बजट में पूरे 21 दिनों तक स्विट्जरलैंड के कोने-कोने की सैर की, जिसमें उनके होटल में ठहरने से लेकर लोकल ट्रांसपोर्ट, ट्रेन पास और खाने-पीने का सारा खर्च शामिल था। सोशल मीडिया पर उनके इस बजट ब्रेकडाउन और यात्रा के अनुभवों ने उन तमाम युवाओं और कपल्स को एक नई उम्मीद दे दी है जो पैसों की कमी के कारण अपने यूरोप ट्रिप के सपने को बार-बार टाल रहे थे। इस विस्तृत लेख में हम आपको उसी स्मार्ट कपल द्वारा अपनाए गए उन तमाम गुप्त तरीकों, होटल बुकिंग ट्रिक्स और सस्ते खानपान के जुगाड़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप भी अपने अगले वेकेशन को बेहद किफायती बना सकते हैं।
स्विट्जरलैंड को महंगा क्यों माना जाता है और इस कपल ने कैसे तोड़ा यह मिथक
स्विट्जरलैंड अपनी खूबसूरती के साथ-साथ दुनिया के सबसे महंगे देशों में शुमार किया जाता है, जहाँ एक साधारण पानी की बोतल या एक कप कॉफी की कीमत भी भारत के मुकाबले कई गुना अधिक होती है। होटल के कमरे, प्रीमियम ट्रेनें और लग्जरी餐廳 पर्यटकों की जेब पर भारी पड़ते हैं, जिसकी वजह से ट्रेवल एजेंसियां भी यूरोप टूर के नाम पर लाखों-करोड़ों के पैकेज थमा देती हैं। लेकिन इस स्मार्ट कपल ने पैकेज टूर के झंझट में पड़ने के बजाय पूरी यात्रा की डिजाइनिंग खुद की, हर एक चीज की बुकिंग महीनों पहले ऑनलाइन रिसर्च करके की और वहां पहुंचने के बाद भी पैसों की बर्बादी करने से बचे। उनका यह मानना था कि अगर आप पीक सीजन (Peak Season) के बजाय ऑफ-सीजन या शोल्डर सीजन में यात्रा की योजना बनाते हैं और लग्जरी होटलों की जगह होमस्टे या अपार्टमेंट चुनते हैं, तो खर्चों में भारी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने अपनी इस 21 दिन की लंबी यात्रा के दौरान किसी भी फाइव-स्टार होटल में रहने के बजाय ऐसे स्वच्छ और आरामदायक स्थानों को चुना जहाँ किचन की सुविधा भी उपलब्ध थी, जिससे उनका खाने का बजट बहुत हद तक कंट्रोल में आ गया। उनके इस अनूठे दृष्टिकोण ने यह दिखा दिया कि यात्रा केवल पैसे खर्च करने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक कला है जिसमें कम बजट में भी दुनिया के सबसे खूबसूरत नजारों का आनंद लिया जा सकता है।
होटल बुकिंग और स्टे के मामले में अपनाई गई खास रणनीतियां
किसी भी विदेश यात्रा के दौरान कुल बजट का सबसे बड़ा हिस्सा यानी लगभग तीस से चालीस प्रतिशत हिस्सा होटल और ठहरने की जगहों पर खर्च हो जाता है, और स्विट्जरलैंड में यह समस्या और भी विकराल रूप ले लेती है। इस कपल ने अपने होटल के खर्च को न्यूनतम रखने के लिए पारंपरिक होटलों के विकल्प को छोड़कर एयरबीएनबी (Airbnb), हॉस्टल और स्थानीय अपार्टमेंट्स का सहारा लिया, जो न केवल किफायती थे बल्कि वहां घरेलू माहौल भी मिल जाता था। उन्होंने ज्यूरिख, इंटरलाकेन, जिरमैट और ल्यूसेंट जैसे महंगे शहरों में रहने के लिए ऐसी जगहों का चुनाव किया जो शहर के मुख्य केंद्र से थोड़े हटकर थीं लेकिन जहां से पब्लिक ट्रांसपोर्ट आसानी से मिल जाता था। इसके अलावा उन्होंने होटल बुक करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा कि कमरे के साथ ब्रेकफास्ट मुफ्त में मिले और यदि संभव हो तो कमरे में छोटा सा किचन या माइक्रोवेव हो ताकि वे रात का खाना खुद तैयार कर सकें। होटल बुक करने के लिए उन्होंने महीनों पहले से विभिन्न ट्रेवल पोर्टल्स पर मिलने वाले डिस्काउंट कूपन और क्रेडिट कार्ड ऑफर्स का जमकर इस्तेमाल किया, जिससे उन्हें भारी-भरकम कैशबैक और छूट मिल गई। इस प्रकार की छोटी-छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण रणनीतियों की बदौलत वे 21 दिनों तक स्विट्जरलैंड के सबसे बेहतरीन लोकेशंस पर रुके बिना अपने बजट को बिगड़ने दिए अपनी यात्रा का आनंद लेते रहे।
खाने-पीने के भारी खर्च से ऐसे बची यह जोड़ी, अपनाए देसी और स्मार्ट उपाय
स्विट्जरलैंड के रेस्तरां में बैठकर खाना खाना किसी आम इंसान के बजट से बाहर हो सकता है क्योंकि वहां मेन्यू कार्ड देखते ही पसीने छूटने लगते हैं, और इस कपल ने इस बात को बहुत जल्दी भांप लिया था। उन्होंने वहां के महंगे रेस्तरां में रोज खाने के बजाय सुपरमार्केट चेन जैसे कि माइग्रोस (Migros) और कोप (Coop) का रुख किया, जो पूरे स्विट्जरलैंड में आसानी से मिल जाते हैं और जहां फ्रेश ग्रॉसरी, सैंडविच, पास्ता और रेडी-टू-ईट मील्स बहुत ही वाजिब दामों पर मिल जाते हैं। इसके अलावा वे अपने साथ भारत से कुछ सूखे मेजे, थेपला, उपमा के पैकेट और मसाले भी लेकर गए थे, जिससे सुबह के वक्त उन्हें देसी नाश्ता बनाने में आसानी होती थी और बाहर खाने की जरूरत नहीं पड़ती थी। जब भी वे दिनभर घूमने के बाद शाम को अपने अपार्टमेंट में लौटते थे, तो वे खुद ही सुपरमार्केट से सामान लाकर हल्का-फुल्का और पौष्टिक खाना तैयार कर लेते थे, जिससे उनका हजारों रुपये का रोज का खर्च बच जाता था। कभी-कभार जब उनका मन बाहर खाने का करता था, तो वे फैंसी रेस्तरां के बजाय लोकल स्ट्रीट फूड आउटलेट्स या बेकरी से पेस्ट्री और लोकल स्नैक्स ट्राई करते थे, जो स्वाद में भी बेहतरीन होते थे और जेब पर भी भारी नहीं पड़ते थे। खानपान में की गई इस समझदारी भरी बचत ने ही उन्हें 21 दिनों तक बिना किसी आर्थिक तनाव के देश के सबसे खूबसूरत इलाकों में घूमने की पूरी छूट दी।
ट्रांसपोर्ट और लोकल ट्रेवल के लिए स्विस ट्रैवल पास का शानदार इस्तेमाल
स्विट्जरलैंड में एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए वहां की ट्रेनें, बसें और केबल कारें दुनिया की सबसे बेहतरीन प्रणालियों में गिनी जाती हैं, लेकिन अगर आप हर बार अलग टिकट खरीदेंगे तो आपका बजट तुरंत धराशायी हो जाएगा। इस कपल ने इस समस्या का सबसे बेहतरीन समाधान निकालते हुए 'स्विस ट्रैवल पास' (Swiss Travel Pass) खरीदा, जो भले ही देखने में एक बार में महंगा लगता है, लेकिन 21 दिनों के हिसाब से यह उनके लिए सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। इस पास की मदद से उन्होंने देश की लगभग सभी ट्रेनों, बसों, नावों और यहां तक कि कई पहाड़ों पर जाने वाली दर्शनीय बोट्स में असीमित यात्रा की, जिससे उन्हें हर सफर के लिए अलग से भारी भरकम टिकट खरीदने की चिंता नहीं सताई। इसके अलावा इस पास के जरिए उन्हें देश के सैकड़ों संग्रहालयों (Museums) में मुफ्त प्रवेश मिला और कई माउंटेन एक्सकर्शन पर भारी डिस्काउंट भी प्राप्त हुआ, जो कुल मिलाकर उनके हजारों रुपये बचा गया। उन्होंने लंबी दूरियों के सफर के लिए हमेशा पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दी और कभी भी वहां कार रेंट पर लेने की गलती नहीं की, क्योंकि कार का किराया और वहां का टोल तथा पार्किंग टैक्स बहुत ज्यादा महंगा होता है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल से न केवल उनका सफर आरामदायक रहा बल्कि वे स्थानीय लोगों की संस्कृति और जीवनशैली को भी बहुत करीब से देख पाए।
7.5 लाख के इस बजट ट्रिप से आम यात्रियों के लिए क्या है बड़ी सीख
इस प्रेरणादायक ट्रैवल स्टोरी से उन सभी भारतीय पर्यटकों को एक बहुत बड़ा संदेश मिलता है जो यह सोचते हैं कि स्विट्जरलैंड घूमना केवल सपनों की बात है और इसके लिए बैंक खाता खाली करना पड़ता है। सही समय पर फ्लाइट की बुकिंग, एडवांस प्लानिंग, स्विस ट्रैवल पास का सही उपयोग, महंगे होटलों के बजाय अपार्टमेंट्स में रहना और रेस्तरां के बजाय सुपरमार्केट से खाना मैनेज करना वे मूल मंत्र हैं जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय यात्रा को किफायती बना सकते हैं। इस कपल ने यह साबित कर दिया कि अगर आपके अंदर घूमने का जनून है और आप पैसों का प्रबंधन स्मार्ट तरीके से करना जानते हैं, तो दुनिया की कोई भी जगह आपके बजट से बाहर नहीं हो सकती। 21 दिनों तक स्विट्जरलैंड की हसीन वादियों में बिताया गया वह समय उनके जीवन का सबसे बेहतरीन अनुभव बन गया, और वह भी तब जब उन्होंने बिना किसी फिजूलखर्ची के बेहद अनुशासित तरीके से अपनी यात्रा पूरी की। यदि आप भी आने वाले दिनों में यूरोप या स्विट्जरलैंड जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इस कपल की इन शानदार टिप्स को अपनी डायरी में नोट कर लें, ताकि आपका अगला वेकेशन भी पॉकेट-फ्रेंडली और यादगार बन सके।