भारत की सांस्कृतिक धरोहर में नारियों का अतुलनीय योगदान
जब भी भारत के भव्य इतिहास, प्राचीन वास्तुकला और ऐतिहासिक स्मारकों (Historical Monuments) की बात होती है, तो हमारे जेहन में अक्सर महान राजाओं, सम्राटों और सुल्तानों के नाम आते हैं। मुग़ल काल से लेकर गुप्त साम्राज्य और राजपूत रजवाड़ों तक, ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि देश के बड़े किलों, महलों और मकबरों का निर्माण केवल पुरुषों ने ही करवाया था। लेकिन भारतीय स्थापत्य कला और इतिहास के पन्नों को अगर गहराई से खंगाला जाए, तो पता चलता है कि हमारी रानियों, बेगमों और वीरांगनाओं ने भी कला, धर्म और प्रेम की ऐसी अमिट छाप छोड़ी है जिसकी मिसाल पूरी दुनिया में नहीं मिलती। भारत में ऐसे कई विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक मौजूद हैं, जिनका निर्माण किसी राजा ने नहीं, बल्कि दूरदर्शी महिलाओं ने अपने प्रेम, भक्ति और स्थापत्य प्रेम के प्रतीक के रूप में करवाया था। इन स्मारकों की भव्यता और नक्काशी देखकर आज भी देश-विदेश के पर्यटक दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं।
1. रानी की वाव (पाटन, गुजरात) - रानी उदयामती का अपने पति के प्रति अमर प्रेम
गुजरात के पाटन जिले में सरस्वती नदी के तट पर स्थित 'रानी की वाव' (Rani Ki Vav) केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में वास्तुकला का एक अद्वितीय नमूना है। सात मंजिला इस भूमिगत बावड़ी (Stepwell) को यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया जा चुका है। इस अद्भुत इमारत का निर्माण सोलंकी राजवंश के राजा भीमदेव प्रथम की याद में उनकी पत्नी रानी उदयामती (Queen Udayamati) ने 11वीं शताब्दी (लगभग 1063 ईस्वी) में करवाया था। इस बावड़ी की दीवारों पर भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों, अप्सराओं और पौराणिक प्रसंगों की 500 से अधिक मुख्य मूर्तियां इतनी बारीकी से उकेरी गई हैं कि दर्शक देखकर मंत्रमुग्ध रह जाते हैं। जल संरक्षण की प्राचीन तकनीक के साथ-साथ यह स्मारक पति-पत्नी के अमर प्रेम की एक बेहद खूबसूरत ऐतिहासिक निशानी माना जाता है।
2. हुमायूँ का मकबरा (दिल्ली) - बेगा बेगम ने बनवाया मुग़ल वास्तुकला का पहला अजूबा
देश की राजधानी दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक 'हुमायूँ का मकबरा' (Humayun's Tomb) अपने शानदार चारबाग गार्डन और लाल बलुआ पत्थर की वास्तुकला के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसी मकबरे की भव्य डिजाइन से प्रेरित होकर आगे चलकर शाहजहाँ ने आगरा में ताजमहल का निर्माण करवाया था। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस विशाल और भव्य स्मारक का निर्माण किसी मुग़ल बादशाह ने नहीं, बल्कि दूसरे मुग़ल सम्राट हुमायूँ की पहली पत्नी और मुख्य बेगम बेगा बेगम (Bega Begum - जिन्हें हाजी बेगम भी कहा जाता है) ने करवाया था। अपने पति की मृत्यु के बाद उनकी याद को अमर बनाने के लिए बेगा बेगम ने 1565 से 1572 के दौरान फारसी वास्तुकार मीरक मिर्जा गियाथ को बुलाकर इस ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण पूरा करवाया था।
3. विरुपाक्ष मंदिर (पट्टदकल, कर्नाटक) - रानी लोकमहादेवी की भव्य विजय गाथा
दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य के पट्टदकल में स्थित 'विरुपाक्ष मंदिर' (Virupaksha Temple, Pattadakal) द्रविड़ वास्तुकला शैली का एक अत्यंत सुंदर और भव्य उदाहरण है। यह विशाल मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। इस ऐतिहासक मंदिर का निर्माण बादामी के चालुक्य राजवंश के राजा विक्रमादित्य द्वितीय की रानी रानी लोकमहादेवी (Queen Lokamahadevi) ने 8वीं शताब्दी (लगभग 740 ईस्वी) में करवाया था। रानी लोकमहादेवी ने कांचीपुरम के पल्लव शासकों पर अपने पति की ऐतिहासिक विजय की खुशी और ईश्वर के प्रति अपनी अटूट भक्ति को प्रकट करने के लिए इस विशाल मंदिर परिसर का निर्माण कराया था, जिसकी वास्तुकला आज भी पर्यटकों को हैरान कर देती है।
4. इत्माद-उद-दौला का मकबरा (आगरा) - नूरजहाँ की अद्भुत संगमरमर की कलाकृति
उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के तट पर स्थित 'इत्माद-उद-दौला का मकबरा' (Itmad-ud-Daulah) को अक्सर 'बेबी ताज' (Baby Taj) के नाम से जाना जाता है। भारत में सफेद संगमरमर और पिएट्रा ड्यूरा (Pietra Dura - पत्थरों पर पच्चीकारी) तकनीक का पहला व्यापक प्रयोग इसी खूबसूरत इमारत में देखने को मिलता है। इस बेहद नक्काशीदार मकबरे का निर्माण मुग़ल सम्राट जहाँगीर की सबसे शक्तिशाली पत्नी साम्राज्ञी नूरजहाँ (Empress Nur Jahan) ने अपने पिता मिर्ज़ा गियास बेग की याद में 1622 से 1628 के बीच करवाया था। इसकी जालीदार खिड़कियां, संगमरमर का काम और शांत वातावरण इसे आगरा के सबसे आकर्षक और मनमोहक ऐतिहासिक स्थलों में से एक बनाता है।
5. महाबोधि मंदिर का पुनरुद्धार और मीरजान मस्जिद - अहिल्याबाई होल्कर और कुदसिया बेगम
भारत के इतिहास में मालवा साम्राज्य की महान शासिका पुण्यश्लोक महारानी अहिल्याबाई होल्कर (Maharani Ahilyabai Holkar) का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने न केवल वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया, बल्कि देश भर में सैकड़ों घाटों, धर्मशालाओं, कुओं और मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया। इसके अतिरिक्त भोपाल की बेगमों में शामिल कुदसिया बेगम (Qudsia Begum) ने भोपाल की प्रसिद्ध 'जामा मस्जिद' और 'गोहर महल' का निर्माण करवाकर अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया था। इन महान महिलाओं द्वारा बनवाए गए ये ऐतिहासिक स्मारक आज भी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, नारी सशक्तिकरण और उनकी अद्वितीय कलात्मक सोच का प्रत्यक्ष प्रमाण बनकर गर्व से खड़े हैं।