भारत के पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी मौत के साक्षी ताशकंद शहर पहुंचे पीएम मोदी
दुनिया के नक्शे पर कई ऐसे ऐतिहासिक शहर बसे हैं जो अपनी खूबसूरत वादियों के साथ-साथ अपने भीतर गहरे रहस्यों को समेटे हुए हैं। मध्य एशिया का एक ऐसा ही बेहद खूबसूरत, शांत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर है उजबेकिस्तान की राजधानी ताशकंद, जिसका नाम सुनते ही भारत के इतिहास का एक ऐसा पन्ना पलट जाता है जो आज भी हर देशवासी की आंखें नम कर देता है। भारत के महान और लोकप्रिय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के जीवन का अंतिम अध्याय इसी ऐतिहासिक शहर में लिखा गया था। हाल ही में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान ताशकंद पहुंचे, तो उन्होंने सबसे पहले उस ऐतिहासिक भूमि को नमन किया जहाँ भारतीय इतिहास की एक बहुत बड़ी घटना जुड़ी हुई है। इतिहास के पन्नों से निकलकर ताशकंद आज दुनिया भर के पर्यटकों के लिए एक ऐसा अद्भुत और मनमोहक पर्यटन स्थल बन चुका है जहाँ सोवियत वास्तुकला, प्राचीन संस्कृति, विशाल पार्क और मेहमाननवाज लोग सैलानियों का दिल जीत लेते हैं। यदि आप भी इतिहास के अनछुए पहलुओं को जानने के साथ-साथ एक शांत और खूबसूरत विदेश यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो ताशकंद आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन साबित हो सकता है।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और ताशकंद का गहरा ऐतिहासिक रिश्ता
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और ताशकंद का नाम आपस में इस तरह जुड़ा हुआ है कि हर भारतीय के दिल में इस शहर के प्रति एक विशेष सम्मान और जुड़ाव महसूस होता है। साल 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शांति समझौते के सिलसिले में शास्त्री जी ताशकंद आए थे। इसी ऐतिहासिक शहर में 11 जनवरी 1966 की रात को उनका संदिग्ध और रहस्यमयी परिस्थितियों में निधन हो गया था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। ताशकंद की उस धरती पर आज भी शास्त्री जी की यादें और उनसे जुड़ी निशानियां जिंदा हैं। शहर में स्थापित उनकी आदमकद प्रतिमा और शास्त्री स्कूल आज भी भारत और उजबेकिस्तान के बीच अटूट मित्रता और आदर भाव के प्रतीक हैं। जब भी कोई भारतीय पर्यटक ताशकंद की यात्रा पर जाता है, तो वह इस ऐतिहासिक स्थल पर श्रद्धांजलि अर्पित करना अपना सबसे बड़ा सौभाग्य मानता है, क्योंकि यह शहर हमारी राष्ट्रीय स्मृति का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
सोवियत वास्तुकला और आधुनिकता का अनूठा संगम है खूबसूरत ताशकंद शहर
ताशकंद केवल इतिहास और दुखों की दास्तां ही नहीं समेटे हुए है, बल्कि यह मध्य एशिया के सबसे आधुनिक, साफ-सुथरे और जीवंत महानगरों में शुमार किया जाता है। साल 1966 में आए एक भीषण भूकंप के बाद इस शहर को पूरी तरह से आधुनिक तरीके से दोबारा डिजाइन और पुनर्निर्माण किया गया था, जिसके चलते यहाँ की वास्तुकला में सोवियत संघ के दौर की भव्य इमारतों और आधुनिक डिजाइन का एक अनोखा और मनमोहक मेल देखने को मिलता है। शहर की सड़कें चौड़ी हैं, चारों तरफ हरियाली से भरे विशाल पार्क हैं और खूबसूरत फव्वारे इस शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। यहाँ का 'अमीर तैमूर स्क्वायर' और 'चोर्सू बाजार' शहर के ऐसे जीवंत केंद्र हैं जहाँ की संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली को बहुत करीब से देखा जा सकता है। ताशकंद की यह साफ-सफाई और अनुशासन पर्यटकों को पहली नजर में ही अपना दीवाना बना लेता है।
चोर्सू बाजार और स्थानीय संस्कृति: जहाँ दिखता है मध्य एशिया का असली रंग
अगर आप किसी शहर की असल रूह को समझना चाहते हैं, तो वहाँ के स्थानीय बाजारों से बेहतर कोई दूसरी जगह नहीं हो सकती। ताशकंद का ऐतिहासिक 'चोर्सू बाजार' (Chorsu Bazaar) अपनी भव्य गुंबदनुमा संरचना और विशालता के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। यह बाजार सदियों से सिल्क रोड (Silk Road) के व्यापारियों का मुख्य केंद्र रहा है। यहाँ प्रवेश करते ही ताजे मेवे, केसर, मसाले, पारंपरिक उजबेक हस्तशिल्प, रंग-बिरंगे कालीन और स्थानीय खान-पान की खुशबू आपका स्वागत करती है। उजबेकिस्तान का पारंपरिक भोजन जैसे 'प्लोव' (Plov) यहाँ आने वाले हर पर्यटक को जरूर चखना चाहिए, जो चावल, मांस और मसालों से तैयार होने वाला एक बेहद स्वादिष्ट व्यंजन है। स्थानीय लोगों का मिलनसार स्वभाव और मेहमाननवाजी पर्यटकों को अपने घर जैसा अहसास कराती है, जिससे यहाँ का सफर और भी ज्यादा यादगार बन जाता है।
ताशकंद के दर्शनीय स्थल: पार्क, स्मारक और मेट्रो स्टेशन जो मोह लेते हैं मन
ताशकंद में घूमने के लिए एक से बढ़कर एक अद्भुत और ऐतिहासिक जगहें मौजूद हैं जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। यहाँ का 'हज़रत इमाम कॉम्प्लेक्स' इस्लामिक इतिहास का एक बहुत बड़ा केंद्र है, जहाँ दुनिया की सबसे पुरानी 'उस्मान कुरान' पांडुलिपि को सुरक्षित रखा गया है, जो इतिहास प्रेमियों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है। इसके अलावा, ताशकंद का मेट्रो नेटवर्क अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ के लगभग हर मेट्रो स्टेशन को एक अलग थीम पर किसी कलाकृति की तरह सजाया गया है, जिन्हें देखकर ऐसा लगता है कि आप किसी कला संग्रहालय के भीतर सफर कर रहे हैं। यहाँ के सुंदर फव्वारे वाले चौक, खोरिजोव और बोस्टन जैसे इलाके शाम के समय रोशनी से जगमगा उठते हैं जहाँ परिवार के साथ टहलना एक बेहद सुकून भरा अनुभव होता है।
भारतीय पर्यटकों के लिए ताशकंद यात्रा क्यों है बेहद आसान और किफायती
हाल के वर्षों में भारतीय पर्यटकों के लिए उजबेकिस्तान की यात्रा करना बेहद आसान और सुलभ हो गया है। उजबेकिस्तान सरकार द्वारा भारतीय नागरिकों के लिए वीजा नियमों को काफी सरल और लचीला बनाया गया है, जिससे टूरिज्म को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। भारत के प्रमुख शहरों से ताशकंद के लिए सीधी उड़ानें (Direct Flights) आसानी से उपलब्ध हैं, और यहाँ का खर्च भी यूरोप या पश्चिमी देशों के मुकाबले काफी किफायती है। भारतीय मुद्रा की तुलना में उजबेकिस्तानी सोम की स्थिति पर्यटकों के लिए बजट फ्रेंडली साबित होती है। इतिहास की गहराई को समेटे हुए, अपनी प्राचीन संस्कृति की खुशबू बिखेरता और आधुनिकता की गोद में बैठा यह ताशकंद शहर हर उस मुसाफिर का खुले दिल से स्वागत करता है जो दुनिया को एक नए और अलग नजरिए से देखना चाहता है।