दशहरा-दिवाली के बीच बनाएं यादगार ट्रिप: दिल्ली के पास मौजूद ये 5 खूबसूरत जगहें मोह लेंगी आपका मन
दशहरे की विदाई और दिवाली के आगमन के बीच का समय साल का सबसे हसीन दौर माना जाता है। उत्तर भारत में इस दौरान न तो चिलचिलाती गर्मी का अहसास होता है और न ही कड़ाके की कंपकंपी वाली ठंड। हल्की गुलाबी ठंड, साफ नीला आसमान और खुशनुमा हवाएं हर किसी को घर से बाहर निकलकर किसी खूबसूरत सफर पर जाने के लिए आमंत्रित करती हैं। दिल्ली-एनसीआर की भागदौड़, भारी ट्रैफिक और प्रदूषण भरे जीवन से कुछ दिनों का ब्रेक लेकर अगर आप परिवार या दोस्तों के साथ सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो यह मौसम वीकेंड ट्रिप के लिए सबसे मुफीद है।
राजधानी दिल्ली की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से महज 3 से 6 घंटे की ड्राइव में आप ऊंचे पहाड़ों, ऐतिहासिक किलों, शांत झीलों और घने जंगलों के बीच पहुंच सकते हैं। फेस्टिव सीजन की छुट्टियों को खास बनाने के लिए आपको बहुत दूर जाने या लंबी फ्लाइट्स लेने की जरूरत नहीं है। अपनी गाड़ी की चाबी उठाइए और दिल्ली के आसपास स्थित इन 5 जादुई ठिकानों की ओर निकल पड़िए, जिनका अनुभव आपकी यादों में हमेशा के लिए तरोताजा रहेगा।
लैंसडाउन: गढ़वाल की शांत वादियों और चीड़ के जंगलों का सुरम्य ठिकाना
यदि आपको पहाड़ों की शांति, चीड़-देवदार के घने जंगल और ब्रिटिश कालीन शांत वातावरण पसंद है, तो उत्तराखंड का लैंसडाउन आपकी पहली पसंद होना चाहिए। दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह खूबसूरत हिल स्टेशन कोटद्वार के रास्ते महज 5 से 6 घंटे में तय किया जा सकता है। लैंसडाउन आज भी बड़े और भीड़भाड़ वाले हिल स्टेशनों जैसे शिमला या मसूरी की व्यावसायिक चकाचौंध से काफी हद तक अछूता है, जो इसे शांति चाहने वाले पर्यटकों के लिए स्वर्ग बनाता है।
इस मौसम में लैंसडाउन की सुबह हल्की धुंध और ताजी हवा से भरी होती है। यहां आप भुल्ला ताल झील में शांत नौकायन का आनंद ले सकते हैं, टिप-इन-टॉप से हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों का दीदार कर सकते हैं और गढ़वाल राइफल्स के ऐतिहासिक रेजिमेंटल म्यूजियम को देख सकते हैं। सेंट जॉन्स चर्च और जंगलों के बीच बने शांत रास्तों पर वॉक करना मन को असीम सुकून पहुंचाता है। दिल्ली के पास होने के कारण यह दो से तीन दिनों की शॉर्ट ट्रिप के लिए सबसे किफायती और बेहतरीन पर्वतीय स्थल है।
नीमराना: अरावली की पहाड़ियों में शाही शानो-शौकत और हेरिटेज का अद्भुत संगम
यदि आप इतिहास, भव्य वास्तुकला और शाही ठाठ-बाट के मुरीद हैं, तो दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48) पर स्थित नीमराना आपके लिए सबसे मुफीद वीकेंड गेटवे है। दिल्ली से मात्र 120 किलोमीटर की दूरी पर बसा यह ऐतिहासिक कस्बा मुश्किल से ढाई से तीन घंटे में पहुंचा जा सकता है। 15वीं शताब्दी में निर्मित नीमराना फोर्ट पैलेस अरावली की पहाड़ियों पर सीढ़ीदार अंदाज में फैला हुआ है, जिसकी शामें सुनहरी रोशनी में नहाकर बेहद जादुई नजर आती हैं।
दशहरा और दिवाली के बीच का यह समय नीमराना घूमने के लिए सबसे मुफीद होता है क्योंकि तेज धूप की तपिश खत्म हो चुकी होती है। फोर्ट परिसर में हेरिटेज वॉक, राजस्थान के पारंपरिक लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां, और विंटेज कार राइड का आनंद लिया जा सकता है। एडवेंचर के शौकीनों के लिए यहां भारत की सबसे रोमांचक जिप-लाइन (Flying Fox) मौजूद है, जहां से आप पूरे किले और पहाड़ियों का विहंगम हवाई नजारा देख सकते हैं। इसके अलावा 9 मंजिला गहरी ऐतिहासिक नीमराना की बावड़ी भी पर्यटकों को अपनी स्थापत्य कला से हैरान कर देती है।
भरतपुर केवलादेव नेशनल पार्क: पक्षी प्रेमियों और प्रकृति के दीवानों की जन्नत
राजस्थान के प्रवेश द्वार पर स्थित भरतपुर का 'केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान' (पूर्व में भरतपुर बर्ड सेंचुरी) यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल एक विश्वप्रसिद्ध ठिकाना है। दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे और आगरा-जयपुर मार्ग के रास्ते लगभग 220 किलोमीटर का सफर तय करके आप 4 घंटे में यहां पहुंच सकते हैं। अक्टूबर का महीना इस राष्ट्रीय उद्यान के लिए बेहद खास होता है क्योंकि इसी समय साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप से हजारों किलोमीटर का सफर तय करके प्रवासी पक्षी यहां अपना डेरा डालना शुरू करते हैं।
इस अभयारण्य का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां प्रदूषण फैलाने वाले मोटर वाहनों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। आप पार्क के भीतर किराए की साइकिल लेकर या स्थानीय ट्रेंड गाइड चालित रिक्शे से शांत वातावरण में घूम सकते हैं। शांत जल निकायों में तैरते दुर्लभ सारस, पेलिकन, बत्तखें और रंग-बिरंगे किंगफिशर को अपने कैमरे में कैद करना एक अविस्मरणीय अनुभव होता है। प्रकृति के करीब रहकर मानसिक शांति पाने के लिए भरतपुर से बेहतर विकल्प दिल्ली के पास शायद ही कोई दूसरा हो।
मोरनी हिल्स: हरियाणा का एकमात्र हिल स्टेशन जहां बसता है अनोखा सुकून
दिल्ली के अधिकांश लोग पहाड़ों के लिए सीधे हिमाचल या उत्तराखंड का रुख करते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित 'मोरनी हिल्स' एक छिपा हुआ नगीना है। दिल्ली से लगभग 260 किलोमीटर दूर स्थित यह शांत पहाड़ी क्षेत्र चंडीगढ़ के पास शिवालिक की पहाड़ियों में बसा हुआ है। दिल्ली से कुरुक्षेत्र और अंबाला होते हुए नेशनल हाईवे पर ड्राइव करते हुए आप 5 घंटे में मोरनी हिल्स की घुमावदार हरी-भरी वादियों में पहुंच सकते हैं।
मोरनी हिल्स समुद्र तल से करीब 1200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जिसके चलते अक्टूबर के महीने में यहां का मौसम बेहद सुहावना और ताजगी भरा रहता है। यहां की 'टिक्कर ताल' दो आपस में जुड़ी खूबसूरत प्राकृतिक झीलें हैं, जहां आप बोटिंग, पैराग्लाइडिंग और कैंपिंग का मजा ले सकते हैं। मोरनी का किला, एडवेंचर पार्क और ट्रैकिंग के छोटे-छोटे ट्रेल्स इसे बच्चों और युवाओं दोनों के लिए एक परफेक्ट हॉलिडे डेस्टिनेशन बनाते हैं। यहां की शांति और कम भीड़भाड़ आपको शहर के शोरगुल से पूरी तरह अलग कर देती है।
सोहना और दमदमा झील: गुड़गांव की सीमा पर सुकून भरी रूरल और एडवेंचर ट्रिप
अगर आपके पास केवल एक या दो दिन का सीमित समय है और आप ज्यादा लंबी ड्राइविंग नहीं करना चाहते, तो दिल्ली से मात्र 50 से 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दमदमा झील और सोहना एक आदर्श विकल्प है। अरावली की तलहटी में बसी दमदमा झील हरियाणा की सबसे बड़ी प्राकृतिक झीलों में से एक है। दिल्ली, नोएडा और गुड़गांव के निवासियों के लिए यह जगह एक त्वरित और तनावमुक्त वीकेंड आउटिंग का जरिया बनती है।
अक्टूबर के इस मौसम में झील के आसपास कई बेहतरीन लक्जरी और रूरल थीम वाले रिजॉर्ट्स सक्रिय रहते हैं, जहां आप ग्रामीण परिवेश, पारंपरिक हरियाणवी भोजन और लोक संगीत का लुत्फ उठा सकते हैं। यहां रॉक क्लाइंबिंग, रैपलिंग, तीरंदाजी, पेंटबॉल और एटीवी राइड्स जैसी ढेर सारी एडवेंचर गतिविधियां उपलब्ध हैं। इसके अलावा सोहना के ऐतिहासिक सल्फर युक्त गर्म पानी के चश्मे (गर्म कुंड) भी देखने लायक हैं, जहां के पानी में औषधीय गुण माने जाते हैं। दिवाली की तैयारियों की व्यस्तता के बीच यह एक दिन की ट्रिप आपकी पूरी ऊर्जा को फिर से रीचार्ज करने के लिए काफी है।