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अगर आपको भी पसंद है खतरों से खेलना, तो माउंट आबू की इन 6 जगहों पर जरूर जाएं

राजस्थान का नाम सुनते ही सबसे पहले दिमाग में तपते हुए रेगिस्तान और आलीशान महलों की तस्वीर उभरती है। लेकिन इसी राज्य में एक ऐसी जादुई और हरी-भरी जगह भी मौजूद है, जिसे राजस्थान का स्वर्ग कहा जाता है— माउंट आबू। अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा यह इकलौता हिल स्टेशन अपनी ठंडी वादियों, खूबसूरत झीलों और शांत वातावरण के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि माउंट आबू सिर्फ शांति पसंद सैलानियों के लिए ही नहीं, बल्कि एडवेंचर के दीवानों और वाइल्डलाइफ लवर्स के लिए भी एक बेहद रोमांचक ठिकाना है? एक वाइल्डलाइफ रिपोर्टर की नजर से देखें तो माउंट आबू के घने जंगलों में एक अलग ही समां बंधता है, जहां खुलेआम घूमते खूंखार तेंदुए (Leopards) और रीछ (Sloth Bears) इंसानों की धड़कनें बढ़ा देते हैं। आइए जानते हैं माउंट आबू के उन 6 सबसे रोमांचक और खतरनाक ठिकानों के बारे में, जहां कदम रखते ही आपका सामना सीधे अरावली के असली राजाओं से हो सकता है।

माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी: भालू और तेंदुओं का सबसे सुरक्षित बसेरा अगर आप माउंट आबू में वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में बेहद करीब से देखना चाहते हैं, तो माउंट आबू वाइल्डलाइफ सेंचुरी आपकी लिस्ट में सबसे ऊपर होनी चाहिए। अरावली की प्राचीन पहाड़ियों में फैली यह सेंचुरी कई लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है। यहां के घने जंगलों में बड़ी संख्या में सुस्त भालू (स्लॉथ बियर) और तेंदुए निवास करते हैं। जब आप इस सेंचुरी के अंदर सफारी के लिए निकलते हैं, तो झाड़ियों के पीछे से गुजरते तेंदुए या अपने बच्चों के साथ घूमते भालू को देखना एक ऐसा अनुभव होता है जो आपके रोंगटे खड़े कर देगा।

ट्रेवर टैंक: मगरमच्छों का तालाब और तेंदुओं का पानी पीने का ठिकाना माउंट आबू के मुख्य शहर से कुछ ही दूरी पर स्थित 'ट्रेवर टैंक' (Trevor's Tank) प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों के लिए एक बेहद पसंदीदा जगह है। यह एक मानव निर्मित टैंक है जिसे विशेष रूप से मगरमच्छों और वन्यजीवों को देखने के लिए बनाया गया था। घने जंगलों और पहाड़ों से घिरी इस जगह की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां दोपहर और शाम के वक्त जंगली जानवर, विशेषकर तेंदुए और भालू अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी के किनारे आते हैं। यहां बने वॉच टावर से इन जानवरों की हरकतों को देखना बेहद रोमांचक और सुरक्षित अनुभव प्रदान करता है।

गुरु शिखर: राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी पर बादलों और वन्यजीवों का मिलन समुद्र तल से 1722 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुरु शिखर न केवल माउंट आबू बल्कि पूरे राजस्थान की सबसे ऊंची चोटी है। यहां से आस-पास की अरावली वादियों का जो नजारा दिखता है, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। लेकिन ऊंचाई और गहरी खाइयों के कारण यह इलाका वन्यजीवों के छिपने के लिए भी एक बेहतरीन जगह है। सुबह और देर शाम के वक्त जब यहां कोहरा छा जाता है, तब इस रास्ते के आस-पास जंगली भालुओं और तेंदुओं की मूवमेंट काफी बढ़ जाती है। यहां तक जाने वाले पहाड़ी रास्तों पर चलते समय अक्सर सैलानियों को इन वन्यजीवों की दहाड़ या उनकी मौजूदगी का अहसास होता है।

शेरगांव: जहां आज भी प्रकृति और खूंखार जानवरों का है राज माउंट आबू के जंगलों के बीच बसा 'शेरगांव' एक ऐसा अछूता और ऑफबीट ठिकाना है जहां पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है। यहां तक पहुंचने के लिए घने जंगलों के बीच से होकर कठिन ट्रेकिंग करनी पड़ती है। इस गांव और इसके आस-पास के रास्तों को तेंदुओं का मुख्य गलियारा (कॉरिडोर) माना जाता है। इस इलाके में ट्रेकिंग करते समय आपको पगबाधा यानी पत्थरों पर तेंदुओं के पैरों के निशान और भालुओं द्वारा खोदी गई मिट्टी साफ नजर आएगी। खतरों से खेलने वाले ट्रैकर्स के लिए शेरगांव किसी जन्नत से कम नहीं है।

सनसेट पॉइंट: डूबते सूरज के साथ शुरू होता है निशाचर जीवों का खेल माउंट आबू आने वाला हर सैलानी सनसेट पॉइंट पर डूबते हुए सूरज की खूबसूरती को निहारने जरूर जाता है। लेकिन जैसे ही सूरज ढलता है और पर्यटकों की भीड़ कम होने लगती है, यह खूबसूरत पॉइंट पूरी तरह से वन्यजीवों के नियंत्रण में आ जाता है। रात के अंधेरे में भोजन और पानी की तलाश में भालू और तेंदुए अक्सर इस पॉइंट के आस-पास की पहाड़ियों पर सक्रिय हो जाते हैं। स्थानीय गाइडों का कहना है कि रात के समय इस इलाके में जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है क्योंकि यह समय इन खूंखार शिकारी जीवों का होता है।

उड़िया गांव: गुफाओं के बीच भालुओं का गढ़ गुरु शिखर के रास्ते में स्थित उड़िया गांव अपनी प्राचीन गुफाओं और पारंपरिक खेती के लिए जाना जाता है। इस गांव के आस-पास का पहाड़ी हिस्सा बड़ी-बड़ी चट्टानों और प्राकृतिक गुफाओं से भरा पड़ा है। ये गुफाएं जंगली भालुओं के छिपने और आराम करने के लिए सबसे पसंदीदा जगह हैं। सर्दियों और मानसून के मौसम में भालू अक्सर इन गुफाओं से बाहर निकलकर खुले रास्तों पर घूमते हुए दिखाई दे जाते हैं। अगर आप स्थानीय गाइड की मदद से इस इलाके को एक्सप्लोर करते हैं, तो आपको बेहद करीब से इन जीवों को देखने का मौका मिल सकता है, बशर्ते आप सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करें।

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